नयी दिल्ली, 10 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायलय ने शुक्रवार को केंद्र को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आपदा प्रबंधन कार्यों के लिये एक नोडल एजेंसी गठित करने वाली याचिका को अनुरोध पत्र जैसा मानने को कहा, ताकि कोविड-19 या भूकंप जैसी किसी आपदा पर प्रतिक्रिया में एकरूपता रहे।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय है और याचिकाकर्ता को पहले केंद्र सरकार से अनुरोध करना होगा।
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अदालत ने विधि के छात्र अर्जुन नारंग की याचिका को एक अनुरोध पत्र मानने और उनके द्वारा दिये गये सुझावों को कानून, नियम, दिशानिर्देश तथा मामले पर लागू सरकारी नीति के अनुरूप विचार करने का केंद्र को निर्देश दिया।
पीठ ने केंद्र से कहा कि वह इस अनुरोध पत्र पर यथाशीध्र एवं व्यवहारिक निर्णय ले तथा अधिवक्ता शांतनु सिंह द्वारा दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।
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याचिका में दलील दी गई है कि एनसीआर सरकारों--दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश की--द्वारा जारी दिशानिर्देशों के बीच कई विसंगतियों होने के कारण दिल्ली-एनसीआर महामारी के प्रसार के खिलाफ प्रतिक्रिया तंत्र के संबंध में क्रियान्वयन समस्याओं का सामना कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि ज्यादातर विसंगतियां अंतर-राज्यीय यात्रा, मरीजों को भर्ती किया जाना और उनका उपचार, जांच, निषिद्ध क्षेत्रों और कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों से जुड़े विषयों में हैं।
याचिका में कहा गया है कि कोविड-प्रतिक्रिया में एकरूपता लाने के लिये यह जरूरी है कि सभी संबद्ध राज्यों के प्राधिकार एकमात्र नोडल एजेंसी के रूप में काम करें, ताकि एनसीआर क्षेत्र में आपदा प्रबंधन कार्य करने में एकरूपता आ सके।
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