खेल की खबरें | भविष्य के मेस्सी बनने का सपना देख रहे अर्जेंटीना के गरीब फुटबॉलरों के सपने महामारी ने तोड़े

यहां फोर्ट अपाचे के अपार्टमेंट ब्लॉक के बाहर कार्लोस टेवेज का भित्तिचित्र और उसके नीचे लिखा वाक्य ‘ मैं उस जगह से आया हूं जहां कामयाब होना नामुमकिन माना जाता है ’ , इन युवा फुटबॉलरों के लिये संजीवनी की भांति रहा है ।

टेवेज ब्यूनस आयर्स के सबसे गरीब इलाके से निकलकर दूसरी श्रेणी के क्लब अलमाग्रो तक पहुंचे । सोलह बरस के आसपास के तमाम फुटबॉलरों के लिये उनकी कामयाबी मील का पत्थर बन गई लेकिन फिर कोरोना वायरस ने दुनिया में दस्तक दी ।

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पिछले 80 दिन से यहां कोई खेल नहीं हुआ है और ना ही भविष्य में जल्दी होने की संभावना है। ऐसे में अर्जेंटीना के गरीब इलाकों से निकले फुटबॉलरों की बेहतर जिंदगी की एकमात्र उम्मीद भी छिनती नजर आ रही है ।

एक फुटबॉलर ने कहा ,‘‘ इस महामारी ने सब कुछ छीन लिया । यह भयावह है । हम घर में बैठे हुए हैं ।’’

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ब्राजील, चिली या पेरू जैसे बाकी लातिन अमेरिकी देशों की तरह तबाही का मंजर अर्जेंटीना में नहीं दिखा लेकिन फुटबॉल के दीवाने इस देश में महामारी के दूरगामी दुष्प्रभाव युवा फुटबॉलरों के कैरियर पर जरूर दिख रहे हैं । इनमें से कइयों ने फुटबॉल छोड़ने का मन बना लिया तो कई ड्रग्स या शराब की लत के शिकार हो रहे हैं ।

कई खतरनाक अवैध खेलों में शामिल हो गए हैं जो फुटबॉल मैदानों के पास रहने वाले खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच इस समय लोकप्रिय है ।

सांता क्लारा क्लब के अध्यक्ष डेनियल लोपेज ने कहा ,‘‘ सड़क पर यह सब दिख रहा है ।बच्चों ने यहां शरण ली थी पर अब नहीं रह सकते ।’’

इस क्लब में 170 लड़के लड़कियां प्रशिक्षण ले रहे थे लेकिन अब इस क्लब को किचन में बदल दिया गया है जहां गरीबों के लिये खाना पकता है ।

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