विदेश की खबरें | पेशावर स्कूल कत्लेआमः न्यायिक आयोग जून के अंत में शीर्ष अदालत को देगा रिपोर्ट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पाकिस्तान के पेशावर में साल 2014 में आर्मी पब्लिक स्कूल में कत्लेआम की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी तफ्तीश पूरी कर ली है और वह इस महीने के अंत तक उच्चतम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दे सकता है।
पेशावर, चार जून पाकिस्तान के पेशावर में साल 2014 में आर्मी पब्लिक स्कूल में कत्लेआम की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी तफ्तीश पूरी कर ली है और वह इस महीने के अंत तक उच्चतम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दे सकता है।
मीडिया में बृहस्पतिवार को आई खबर में यह जानकारी दी गई है।
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यह आयोग शीर्ष के आदेश पर पेशावर उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2018 को बनाया था।
डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, आयोग से जुड़े इमरानुल्ला खान ने यहां बुधवार को कहा कि आयोग अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहा है और जून के अंत तक इसे उच्चतम न्यायालय में जमा करा सकता है।
इमरानुल्ला के मुताबिक, " न्यायिक आयोग के पेशावर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मोहम्मद इब्राहिम खान ने जख्मी विद्यार्थियों, मृतक छात्रों के माता-पिता, सेना और पुलिस के अफसरों समेत 140 लोगों के बयान दर्ज किए थे और पुलिस तथा सुरक्षा एंजेसियों की जांच का परीक्षण किया था। "
बंद कमरे में हुई कार्यवाही के दौरान कुछ माता-पिता ने आयोग से पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ तथा सेना के पूर्व प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को समन करने का आग्रह किया था।
बहरहाल आयोग ने इस आग्रह को खारिज करते हुए कहा कि उन दोनों का उसके सामने पेश होना जरूरी नहीं है।
पिछले साल भारत-पाक सीमा पर तनाव की वजह से फौज के कुछ अधिकारियों के उसके सामने पेश होने में देरी हुई थी।
तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश मियां साकिब निसार ने पेशावर की अपनी यात्रा के दौरान अप्रैल 2018 में मामले का संज्ञान लिया था। तब स्कूल में हुए आतंकी हमले में मारे गए कई छात्रों के माता-पिता ने निसार से संपर्क कर उनकी शिकायतों का निदान करने की गुजारिश की थी।
माता-पिता ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी प्राधिकरण ने 28 अगस्त 2014 को अलग अलग प्रांतीय और संघीय प्राधिकारिओं को सूचित किया था कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान आर्मी पब्लिक स्कूल और कॉलेज तथा फौज की ओर से चलाए जाने वाले शिक्षण संस्थानों पर हमला कर सकता है। इसके बाद भी पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। इस हमले में 147 लोगों की मौत हुई थी।
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