देश की खबरें | चंपावत में भूस्खलन के कारण फंसे लोग, धामी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

देहरादून, 21 जुलाई उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार बारिश से हुए भूस्खलन के कारण करीब दो दर्जन लोग अब भी फंसे हुए हैं जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी जिले में बादल फटने से प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया ।

टनकपुर-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर विश्रामघाट में भूस्खलन के मलबे के कारण यातायात अवरूद्ध होने से फंसे लोगों के लिए चंपावत जिला प्रशासन द्वारा ठहरने और खाने—पीने की व्यवस्था की गई है जबकि मलबा हटाकर मार्ग खोलने का कार्य किया जा रहा है ।

चंपावत के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडे ने बताया कि लगातार बारिश के दौरान मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आठ स्थानों पर पहाडों से हुए भूस्खलन के चलते यातायात बंद हो गया था जिससे करीब 150 लोग फंस गए थे ।

उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोगों को देवीधुरा के रास्ते हल्द्वानी भेज दिया गया जबकि करीब दो दर्जन लोग अब भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मार्ग से मलबा के हटाये जाने का इंतजार कर रहे हैं ।

पांडे ने बताया कि सात स्थानों पर मंगलवार शाम तक वाहनों का आवागमन सुचारू कर दिया गया लेकिन विश्रामघाट में भारी मलबा आने तथा लगातार बारिश होने से मार्ग अभी साफ नहीं हो पाया है ।

उन्होंने बताया कि बाराकोट तहसील के रोनीगाड में बारिश के दौरान एक महिला बह गयी जिसकी खोज के लिए भी तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है ।

मुख्यमंत्री बुधवार को उत्तरकाशी के बादल फटने से प्रभावित गांवों मांडौ और कंकराडी की स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां पहुचे और उन्होंने प्रभावितों को सरकार से हर संभव मदद का भरोसा दिया ।

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के साथ मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने मांडौ और कंकराडी गांवों के लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं ।

उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को मांडौ गांव के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए ।

मांडौ गांव में रविवार देर रात बादल फटने से एक बालिका समेत एक परिवार की तीन महिलाओं की मृत्यु हो गयी थी जबकि निकटवर्ती कंकराडी गांव में एक व्यक्ति लापता हो गया था ।

प्रदेश के अनेक स्थानों पर हो रही बारिश से नदियों के बढे जलस्तर को देखते हुए नदियों के किनारे रहने वाले लोगों तथा पर्यटकों को नदी—नालों से दूर रहने की सलाह दी गयी है ।

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