बेंगलुरु, छह नवंबर कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली ने सोमवार को कहा कि दलितों सहित राज्य में सभी समुदाय अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान को ही लेना होगा।
वाल्मिकी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय के नेता जारकीहोली ने अपने समुदाय के संत के उस बयान को भी तवज्जो नहीं देने की कोशिश की, जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा जताई गई थी। मंत्री ने कहा कि यह एक पुराना मुद्दा है और इस तरह की मांग पहले भी विभिन्न कार्यक्रमों और मंचों पर की गई है।
कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री जारकीहोली ने एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसमें कोई नयी बात नहीं है, 2013 में भी दलित समुदाय से मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की गई थी। यह मुद्दा बार-बार उठाया गया और उसके बाद पांच वर्षों तक चलता रहा, लेकिन तस्वीर साफ नहीं हो सकी, यह स्थिति है।’’
यह पूछे जाने पर कि ‘‘तस्वीर कब साफ होगी’’, उन्होंने जवाब दिया, ‘‘हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। 2008 में भी खरगे जी (मल्लिकार्जुन खरगे) को दावेदार बनाकर दलित समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी थी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला, जी परमेश्वर (अब गृह मंत्री) आठ साल तक पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रहे और उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन उन्हें भी मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं मिला।’’
राज्य में दलित समुदाय से मुख्यमंत्री बनाए जाने की उसकी (समुदाय की) मांग का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि यह पर पार्टी को निर्णय लेना है और इस मुद्दे पर पार्टी का निर्णय अंतिम होगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस सरकार के (गठन होने के) ढाई साल बाद यह हो सकता है, जारकीहोली ने कहा, ‘‘यह हमारे हाथ में नहीं है। पार्टी में आलाकमान, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष हैं, आपको उनसे पूछना होगा, मैं नहीं कह सकता। वे इसे स्पष्ट कर सकते हैं, इंतजार करिए और देखिए।’’
जी परमेश्वर के आवास पर एक हालिया रात्रिभोज बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, जारकीहोली और मंत्री एच सी महादेवप्पा की मौजूदगी को लेकर इस बारे में कयास लगाए जा रहे थे कि कमान परिवर्तन की स्थिति में परमेश्वर मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री बदले जाने के संबंध में कांग्रेस पार्टी के अंदर दावे-प्रतिदावे के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी गई।
जारकीहोली को मुख्यमंत्री बनाने संबंधी वाल्मीकि गुरुपीठ के संत प्रसन्नानंद स्वामीजी की मांग के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, ‘‘स्वामी जी शुरू से यह कह रहे हैं, यहां तक कि हमारे सत्ता में आने से पहले से वह ऐस कह रहे हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं हैं। सामुदायिक मंचों पर यह मुद्दा उठा था, यह एक पुराना मुद्दा है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या वह मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं, उन्होंने कहा कि यह मांग सभी समुदायों--दलित, लिंगायत, वोक्कालिगा--से है कि उनके नेता मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि इसी तरह उन्हें भी मुख्यमंत्री बनाने की मांग है, और इसमें कुछ खास नहीं है।
मध्य प्रदेश में एक चुनावी रैली में सिद्धरमैया के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए जारकीहोली ने कहा कि चुनावी सभाओं में राजनीति से प्रेरित आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना कठिन होता है।
मोदी ने कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि सिद्धरमैया कब तक (कर्नाटक के) मुख्यमंत्री रहेंगे, और राज्य को लूटने में मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री (डीके शिवकुमार) के बीच प्रतिस्पर्धा है।
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