किरानहर (पश्चिम बंगाल), एक सितंबर पश्चिम बंगाल के बीरभूम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके पैतृक मंदिर में कुछ लोग इकट्ठा हुए । लोगों ने अपने ‘पोल्टू दा’ की याद में मंदिर में लगी एक कुर्सी पर रखे उनके तैल चित्र के सामने मोमबत्ती जलायी और उन्हें पुष्पांजलि दी । इसी कुर्सी पर बैठकर मुखर्जी दुर्गा पूजा के दौरान श्लोक पढ़ते थे ।
पिछले तीन सप्ताह से मुखर्जी के स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ उनके पड़ोसी और परिवार के सदस्य यज्ञ कर रहे थे। मंगलवार को मिरती गांव में मुखर्जी के कामदा किंकर भवन में कई इकट्ठा हुए। अधिकतर लोग उनके साथ अपने जुड़ाव को याद कर रहे थे।
मंदिर में खड़े परिवार के पुजारी बिपातरन मुखोपाध्याय ने कहा, ‘‘गांव ने अपना अभिभावक खो दिया।’’ मंदिर में चिकनी मिट्टी से बनायी जा रही देवी दुर्गा की अर्द्धर्निमित प्रतिमा भी खड़ी है। हर साल की तरह रथ यात्रा पर इसका काम शुरू हुआ था।
मुखर्जी पूर्व के वर्षों में जब यहां आते थे तो वह मंदिर में फर्श पर बैठ जाते थे और पूजा करते थे । बाद के दिनों में वहां उनके लिए लकड़ी की एक कुर्सी लगा दी गयी।
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गांव के कई बुजुर्गों ने कहा कि उनके बिना दुर्गा पूजा पर अब पहले जैसी रौनक नहीं रहेगा।
मिरती के एक निवासी करूणा शंकर रॉय ने कहा, ‘‘हम सौभाग्यशाली हैं कि इस देश का महान सपूत हमारे गांव में हुआ। उनके निधन से एक खालीपन पैदा हो गया है जिसे भरा नहीं जा सकता।’’
स्वतंत्रता सेनानी कामदा किंकर मुखर्जी के बेटे पूर्व राष्ट्रपति ने किरानहर में शिवचंद्र उच्च विद्यालय से पढ़ाई की। सिउरी में विद्यासागर कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया।
मुखर्जी का सोमवार को दिल्ली में एक सैन्य अस्पताल में निधन हो गया। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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