जरुरी जानकारी | मूंगफली और सीपीओ तेल कीमतों में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. गुजरात में सहकारी संस्था नाफेड द्वारा मूंगफली की बिकवाली करने से स्थानीय तेल तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। मलेशिया और इंडोनेशिया में सीपीओ एवं पामोलीन तेल का अत्यधिक स्टॉक होने एवं अगली बम्पर पैदावार होने की संभावना के कारण मांग होने के बावजूद पाम तेल कीमतों में नरमी रही। दूसरी ओर देश में ब्लेंडिंग की मांग बढ़ने से सोयाबीन डीगम के साथ साथ सोयाबीन के अन्य तेलों की कीमतों में सुधार आया।
नयी दिल्ली, छह अगस्त गुजरात में सहकारी संस्था नाफेड द्वारा मूंगफली की बिकवाली करने से स्थानीय तेल तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। मलेशिया और इंडोनेशिया में सीपीओ एवं पामोलीन तेल का अत्यधिक स्टॉक होने एवं अगली बम्पर पैदावार होने की संभावना के कारण मांग होने के बावजूद पाम तेल कीमतों में नरमी रही। दूसरी ओर देश में ब्लेंडिंग की मांग बढ़ने से सोयाबीन डीगम के साथ साथ सोयाबीन के अन्य तेलों की कीमतों में सुधार आया।
बाजार सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की देश में बढ़ती मांग के आगे देशी तेल तिलहनों को बाजार में खपाना मुश्किल होता जा रहा है। वायदा कारोबार में भी इन तेलों के भाव लागत से काफी कम बोले जा रहे हैं तो ऐसे में किसान, देशी तेल तिलहन उद्योग परेशान हैं कि उनके माल कहां खपेंगे जहां किसानों के पास पहले से मूंगफली और सोयाबीन का काफी स्टॉक पड़ा है और आगामी फसल भी बम्पर रहने की संभावना है।
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उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात को संज्ञान में लेना चाहिये कि कुछ तेल आयातक, विदेशों में जिस भाव पर खरीद रहे हैं उसी तेल को बैंकों में अपने कारोबारी रिण खाते को चलाते रहने के लिए, बाजार में सस्ते भाव पर बेच रहे हैं (बेपरता बिकवाली कर रहे हैं) और आगे अपने रिण अदायगी के समय को आगे बढ़वाते रहते हैं। सरकार को ऐसे तत्वों पर नकेल कसनी चाहिये क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा की हानि हो रही है, बैंकों के खराब रिण में वृद्धि हो रही है तथा तेल तिलहन उद्योग एवं किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इन्हीं वजहों से लगभग 70 प्रतिशत खाद्य तेलों के आयात करने वाले देश में देशी तेल मिलें बंद हो रही हैं जबकि विदेशों में तेल मिलें जोर शोर से चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन डीगम के भाव पांच प्रतिशत बेपरता बैठ रहे हैं जबकि सीपीओ के भाव 200 रुपये क्विन्टल बेपरता बैठते हैं। इसी प्रकार सूरजमुखी 400 रुपये क्विन्टल और सोयाबीन डीगम 300 रुपये क्विन्टल बेपरता बैठते हैं। ऐसे बेपरता कारोबार करने वालों पर नकेल नहीं कसी गई तो बैंकों के पैसे डूबने की पूरी आशंका है।
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सूत्रों ने कहा कि गुजरात में सहकारी संस्था नाफेड की बिकवाली से मूंगफली के भाव में हानि दर्ज हुई।
तेल-तिलहन के बृहस्पतिवार को बंद भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)
सरसों तिलहन - 4,930- 5,000 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।
मूंगफली दाना - 4,605- 4,655 रुपये।
वनस्पति घी- 965 - 1,070 रुपये प्रति टिन।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 12,020 रुपये।
मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,805- 1,855 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,595 - 1,735 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,705 - 1,825 रुपये प्रति टिन।
तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपये।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,420 रुपये।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,150 रुपये।
सोयाबीन तेल डीगम- 8,320 रुपये।
सीपीओ एक्स-कांडला-7,400 से 7,430 रुपये।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,300 रुपये।
पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 8,900 रुपये।
पामोलीन कांडला- 8,140 रुपये (बिना जीएसटी के)।
सोयाबीन तिलहन डिलिवरी भाव 3,625- 3,650 लूज में 3,360--3,425 रुपये।
मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपये
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 06, 2020 05:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

