इस्लामाबाद, चार जुलाई पाकिस्तान की एक अदालत ने संकट में घिरे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को राहत देते हुए मंगलवार को एक सत्र अदालत के फैसले को पलट दिया और कहा कि खान के खिलाफ तोशाखाना भ्रष्टाचार मामला सुनवाई योग्य नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हुमायुं दिलावर ने 10 मई को तोशाखाना मामले में खान (70) को दोषी ठहराया था, जिन्होंने मामले के सुनवाई योग्य नहीं होने की दलीलों को खारिज कर दिया था।
इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख खान ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने किसी भी आपराधिक कार्यवाही पर आठ जुलाई तक रोक लगा दी थी।
न्यायमूर्ति आमेर फारूक ने जून में सुनवाई फिर से शुरू होने के बाद 23 जून को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए मामला ईद उल-अजहा के बाद के लिए सूचीबद्ध किया था।
‘डॉन’ अखबार के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश आमेर फारूक ने मंगलवार को तोशाखाना मामले में आदेश सुनाया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। एक दिन पहले ही पीटीआई के प्रमुख ने न्यायमूर्ति फारूक के मामले से अलग होने का अनुरोध करते हुए अदालत में एक अर्जी दायर की थी।
तोशाखाना कैबिनेट प्रभाग के प्रशासनिक नियंत्रण वाला विभाग है जहां अन्य देशों की सरकार व राष्ट्र प्रमुखों द्वारा पाकिस्तानी शासकों, सांसदों, नौकरशाहों और अधिकारियों को दिए गए उपहारों को रखा जाता है।
खान पर 2018 से 2022 के बीच प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कार्याकाल के दौरान पद का दुरुपयोग इन उपहारों को खरीदने और बेचने के लिए करने का आरोप है। इन उपहारों की कीमत 14 करोड़ रुपये (6,35,000 अमेरिकी डॉलर) से अधिक है।
पाकिस्तान के चुनाव आयोग द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री को ‘‘झूठे बयान और गलत हलफनामा’’ देने के लिए अयोग्य ठहराए जाने के बाद यह राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया।
उच्च न्यायालय ने सत्र अदालत से पूर्व प्रधानमंत्री की याचिका पर फिर से सात दिन के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि सत्र अदालत ने ‘‘मुद्दा लंबित छोड़ दिया था और याचिकाकर्ता की याचिका को मामूली कारणों से खारिज कर दिया था जिससे मुख्य कानूनी मुद्दे अनसुलझे रह गए।’’
पूर्व प्रधानमंत्री खान की पार्टी के वकील गौहर खान ने इस फैसला को ‘‘जीत’’ करार दिया।
खान के खिलाफ देश भर में 140 से अधिक मामले हैं और उन पर आतंकवाद, हिंसा, ईशनिंदा, भ्रष्टाचार और हत्या जैसे आरोप हैं।
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