इस्लामाबाद, 21 अप्रैल पाकिस्तान की संसद ने उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने तथा मामलों में सुनवाई के लिए न्यायाधीशों की समिति बनाने के अधिकारों पर लगाम लगाने के लिए शुक्रवार को एक कानून अधिसूचित किया।
पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पाकिस्तान लीग नवाज (पीएमएल-एन) नीत सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय (कार्य एवं प्रक्रिया) विधेयक, 2023 पर जोर देने के बाद से न्यायपालिका और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच रिश्तों में तनाव आ गया है।
प्रधान न्यायाधीश के स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने तथा न्यायाधीशों की समिति बनाने के अधिकार को कम करने के लिए यह विधेयक लाने पर सरकार जोर दे रही थी।
शुरू में संसद के दोनों सदनों में विधेयक को पारित किया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए उन्हें भेजा गया।
हालांकि, राष्ट्रपति ने इसे वापस भेज दिया और कहा कि प्रस्तावित कानून संसद अधिकार क्षेत्र से परे है।
संसद की संयुक्त बैठक में 10 अप्रैल को दूसरी बार विधेयक कुछ संशोधन के साथ पारित किया गया।
अपने ट्विटर खाते के जरिये नेशनल असेंबली ने घोषणा की कि विवादित विधेयक कानून बन गया है।
नेशनल असेंबली के ट्वीट में कहा गया है, ‘‘मजलिस-ए-शूरा (संसद) के उच्चतम न्यायालय (कार्य एवं प्रक्रिया) अधिनियम, 2023 को पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है, यह मान लिया गया है। इसलिये, इसे सामान्य जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है।’’
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