संयुक्त राष्ट्र, 16 जुलाई विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि श्रीलंका की कुल आबादी में से 60 लाख यानी 28 प्रतिशत से अधिक लोग ''खाद्य असुरक्षा'' का सामना कर रहे हैं तथा ये हालात और खराब होने की आशंका है क्योंकि सबसे बदतर आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में संकट गहराता जा रहा है।
श्रीलंका फिलहाल गिरते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण गंभीर संकट जूझ रहा है और सरकार आवश्यक आयात के लिए भुगतान करने में सक्षम नहीं है।
आर्थिक संकट के कारण खाद्य सामग्री, दवाओं, रसोई गैस, ईंधन और टॉयलेट पेपर की भारी किल्लत हो गई है। लोगों को ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने शुक्रवार को श्रीलंका की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि देश की 63 लाख यानी 28 प्रतिशत आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है और संकट गहराने के कारण हालात और खराब हो सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से कम से कम 65,600 लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। डब्ल्यूएफपी ने आगाह किया कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
डब्ल्यूएफपी ने कहा कि भोजन की आसमान छूती कीमतों के कारण लोगों के लिए खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। लगभग 67 लाख लोग पर्याप्त आहार नहीं ले पा रहे हैं।
एजेंसी 2022 में 34 लाख लोगों तक पहुंचने के लिए अपनी पहुंच बढ़ा रही है।
डब्ल्यूएफपी ने कहा कि उसे अपनी जीवन रक्षक सहायता के लिए तत्काल 6. 3 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है।
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