कोलकाता, 22 जून तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि बिहार के पटना में शुक्रवार को आयोजित होने जा रही विपक्षी दलों की बैठक 2024 के आम चुनाव से पहले ‘‘एक अच्छी शुरुआत’’ है।
तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ‘‘अलोकतांत्रिक एवं तानाशाही नीतियों’’ का आरोप लगाते हुए इनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी दलों के एकजुट होने के महत्व पर जोर दिया।
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) (जद-यू) नेता नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, एम के स्टालिन, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती और हेमंत सोरेन एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है। जद-यू ने पिछले साल भाजपा का साथ छोड़ दिया था।
विपक्षी दलों की बैठक के लिए ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी होंगे।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘‘पटना पहुंचने से पहले ही एक अच्छी शुरुआत... देश के संविधान को बचाने के लिए काम कर रहे सभी दल कई मुद्दों पर एकमत हैं। अभी के लिए, हमारे पास एक तारीख, एक स्थान और एक समझौता है कि बैठक में हर पार्टी के प्रमुख रहेंगे।’’
तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसके बाद अगली बैठक की तारीख और स्थान पटना में तय किया जाएगा। इसके अलावा, यही सलाह है कि कोई भी बैठक को लेकर अटकल न लगाए।’’
पटना में विपक्षी नेताओं की बैठक आयोजित करने का विचार बनर्जी द्वारा रखा गया था, जिन्होंने अप्रैल में कोलकाता में नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए उनका जिक्र किया था।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि विपक्षी एकता जल्द से जल्द आकार ले क्योंकि 2024 के आम चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है।
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