देश की खबरें | जम्मू कश्मीर के बजट, अनुदान की मांगों पर चर्चा के लिये सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष ने किया विरोध

नयी दिल्ली, 14 मार्च लोकसभा में केंद्रशाासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के बजट और वर्ष 2021-22 की अनुदान की अनुपूरक मांगों को पेश करने एवं उसी दिन चर्चा कराने के लिये नियमों में छूट संबंधी सरकार के प्रस्ताव का कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने विरोध किया तथा ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से जुड़े बजट के प्रस्तावों के अध्ययन के लिये पर्याप्त समय दिये जाने की मांग की।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के बजट एवं अनुदान की अनुपूरक मांगों के साथ एक प्रस्ताव भी पेश किया जिसमें कुछ नियमों को निलंबित करके सदन में इसे पेश किये जाने के दिन ही चर्चा शुरू करने की अनुमति देने की बात कही गई है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘ यह सभा, लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 205 को जम्मू कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र सरकार के वर्ष 2022-23 के बजट तथा वित्त वर्ष 2021-22 के अनुदान की अनुपूरक मांगों को लागू करने के संबंध में निलंबित करती है ताकि बजट को उसी दिन प्रस्तुत किया जा सके और उस पर चर्चा की जा सके।’’

नियम 205 में यह उपबंध है कि बजट पर उस दिन कोई चर्चा नहीं होगी जिस दिन इसे सभा में प्रस्तुत किया जाता है।

प्रस्ताव का विरोध करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि बजट की जांच परख एवं चर्चा करना इस सदन की बुनियादी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा नहीं है, ऐसे में इस पर चर्चा करने की जिम्मेदारी इस सदन की है।

उन्होंने सवाल किया कि जब सदस्यों के पास बजट से जुड़ा कोई कागज नहीं है तो फिर किस चीज पर चर्चा होगी?

तिवारी ने कहा कि इस पर कल चर्चा होनी चाहिए और आसन को इस बारे में व्यवस्था देनी चाहिए।

आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि नियम में 205 बहुत स्पष्ट है कि बजट को पेश करने के दिन इस पर चर्चा नहीं होगी और संविधान में इसका प्रावधान है।

इस पर पीठासीन सभापति राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि अगर यह विषय एजेंडे में शामिल है जो इसकी लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी दी होगी।

इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से इस नियम में छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

भोजनावकाश के बाद सदन में केंद्रशाासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिये बजट एवं अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा शुरू होने पर आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने सदन के कामकाज के नियम 216 के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठाया।

उन्होंने कहा कि नियम में स्पष्ट है कि मूल मांगों पर अनुदान की अनुपूरक मांगों के साथ चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इसके लिए अध्यक्ष को नियम 188 के तहत नियम 216 को निलंबित करना होगा।

इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 में भी दिल्ली केंद्रशासित क्षेत्र के लिए तत्कालीन संप्रग सरकार ने बजट के साथ अनुपूरक मांगों को चर्चा के लिए रखा था। उन्होंने कहा कि उस समय भी आसन ने अनुमति दी थी और इस बार भी अध्यक्ष ने इसके लिए अनुमति दी है।

वहीं, भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 357 के अनुसार, जब कहीं विधायिका नहीं है तो संसद को अधिकार है और अनुच्छेद 118 के तहत उसे अधिकार है कि संसद को इस तरह के वित्तीय काम को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।

इस पर पीठासीन सभापति भर्तृहरि महताब ने कहा कि वह लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सदन को बताना चाहते हैं कि आगामी वित्त वर्ष के लिए अनुदानों की मांगें वित्त वर्ष की शुरुआत से पूर्व ही प्रस्तुत की जाती हैं और पारित होती हैं।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 115 में निर्दिष्ट प्रावधान का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को आवश्यकता है तो सरकार अनुदान की अनुपूरक मांगें ला सकती है।

उन्होंने कहा कि इन पर एक सार्थ चर्चा करने से नियम का उल्लंघन नहीं होता, इसलिए व्यवस्था के प्रश्न को खारिज किया जाता है।

महताब ने यह भी कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी राज्य के बजट पर चर्चा उसके प्रस्तुत किये जाने के दिन ही हो रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी ऐसा हुआ है और इसी प्रकार की अनुदान की अनुपूरक मांगें भी प्रस्तुत किये जाने के दिन ही चर्चा के लिए ली गयी हैं।

वहीं, कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि अन्य केंद्रशासित प्रदेश हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर के बजट पर इस सदन में अलग से चर्चा क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह परंपरा डाल रही है तो चंडीगढ़, लक्षद्वीप और दमन दीव के बजट पर भी चर्चा होनी चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने विरोध करने वाले सदस्यों से पूछा कि 2014 में दिल्ली के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा के समय कांग्रेस सदस्य ने विरोध क्यों नहीं किया।

इस पर तिवारी ने कहा कि 2014 में भाजपा विपक्ष में थी, उसे तब आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह बचाव का कोई तर्क नहीं है।

दूसरी ओर, पीठासीन सभापति महताब ने कहा कि सदन परिपाटियों से भी चलता है और नियम 205 को निलंबित करते हुए चर्चा की अनुमति पूरे सदन ने दी है।

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