ताजा खबरें | राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर बहुसंख्यकवाद में लिप्त रहने का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 18 सितंबर राज्यसभा में सोमवार को विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर निशाना साधते हुए उस पर बहुसंख्यकवाद में लिप्त होने और संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों की अवहेलना करने का आरोप लगाया।

संसद के 75 साल के सफर पर उच्च सदन में चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार पर ‘बुलडोजर’ के जरिए न्याय करने का भी आरोप लगाया और बेरोजगारी के गंभीर परिणामों के बारे में आगाह भी किया।

चर्चा में भाग लेते हुए राजद के मनोज कुमार झा ने संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर को उद्धृत किया और कहा कि लोकतंत्र का मतलब ‘‘बहुसंख्यकों के अत्याचार को रोकना’’ भी है।

उन्होंने कहा कि बहुमत की जरूरत है, क्योंकि सरकारें बहुमत के बिना नहीं चल सकतीं, लेकिन बहुमत और बहुसंख्यकवाद में अंतर होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब हमारी सरकार इस अंतर को भूल जाती है... जब हम एक छोटी सी भी आलोचना करते हैं, जो कभी व्यक्तिगत नहीं होती है, तो हमें पाकिस्तान जाने के लिए कहा जाता है।’’

झा ने कहा कि अगर सरकार की आलोचना करने वाले हर किसी को पड़ोसी देश जाना होगा, तो यह सभी को समायोजित करने में सक्षम नहीं होगा।

चर्चा में भाग लेते हुए केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मणि ने कहा, ‘‘यह एक निर्विवाद तथ्य है कि हाल के वर्षों में अलोकतांत्रिक संसदीय तरीकों और प्रक्रियाओं के उदाहरण देखे गए हैं, जिसने लोकतंत्र के सार को खतरे में डाला।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ऐसे मौके आए हैं, जब विधायी चर्चा में कटौती की गई, विपक्ष की आवाज को दबा दिया गया और महत्वपूर्ण विधेयकों को उचित चर्चा और जांच-परख के बिना पारित कर दिया गया।’’

मणि ने दावा किया कि लोकतांत्रिक प्रणाली के आंतरिक हिस्से संसद की समितियों की अखंडता से कई बार समझौता किया गया है।

उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में देरी और इन समितियों के राजनीतिकरण ने नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि केवल 25 प्रतिशत विधेयकों को ही इन समितियों को भेजा गया।

केरल कांग्रेस (एम) के नेता ने कहा, ‘‘16 वीं लोकसभा के दौरान विधेयकों को समितियों के पास भेजे जाने की इतनी कम दर स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सरकार समितियों को लेकर गंभीर नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि चाहे वह नागरिक संस्थाएं हों, शिक्षाविदों हों या मीडिया हो, असहमति का दमन किया जाना गहरी चिंता का विषय है।

द्रमुक के तिरुचि शिवा ने दावा किया कि विपक्ष के लिए जगह कम हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को जवाबदेह ठहराने की संसद की क्षमता में गिरावट आई है... सरकार कानून बनाने के बजाय अध्यादेशों का सहारा लेती है।’’

इसका जवाब देते हुए सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘‘आप सही हैं, लेकिन जब मैं अपने भीतर झांकता हूं, तो पाता हूं कि आप लोगों ने मिले हुए अवसर गंवा दिए हैं। पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे। इसका लाभ क्यों नहीं उठाया गया? हमें बहुत तर्कसंगत और प्रतिबद्ध होना होगा।’’

बीजू जनता दल के अमर पटनायक ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में राज्यों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है और धन के हस्तांतरण को लेकर वित्तीय संबंधों में समस्याएं रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि केंद्रीय खजाने में आने वाले उपकर और अधिभार को विभाज्य पूल में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि राज्य को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और टिकाऊ बनाया जा सके।’’

वाईएसआर कांग्रेस के एस निरंजन रेड्डी ने कहा कि संसद नए भवन में स्थानांतरित हो रहा है, ऐसे में दक्षिण भारतीय राज्यों में चिंता है।

उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिण भारतीय राज्य, अधिक विकसित भारतीय राज्य, महसूस कर रहे हैं कि क्या उनकी संख्या कम हो जाएगी, क्योंकि अनुच्छेद 82, वर्ष 2026 तक सुरक्षा प्रदान करता है। क्या इसे किसी तरह से संतुलित किया जाएगा? हम इस पर चर्चा करेंगे।’’

अनुच्छेद 82 लोकसभा को आवंटित सीट की संख्या से संबंधित है।

माकपा के जॉन ब्रिटास ने कहा कि आंबेडकर के अनुसार ‘‘लोकतंत्र बहुसंख्यकों का कानून नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा है’’। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार संसद के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही के संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपने कभी विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही देखी है? संसद में प्रधानमंत्री की उपस्थिति क्या है? 0.001 प्रतिशत! यही वह अवधि है, जिसमें उन्होंने संसद सत्र में भाग लिया।’’

न्याय के मोर्चे पर उन्होंने कहा, ‘‘आप देखेंगे कि हम ‘बुलडोजर युग’ में पहुंच गए हैं। जो न्याय दिया जा रहा है, वह बुलडोजर युग है।’’

एमडीएमके के वाइको ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का गठन सरकार के लिए खतरा साबित हुआ, जिसके कारण उसे जी20 शिखर सम्मेलन में पट्टिका पर देश का नाम ‘भारत’ के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ में बदलने की कोशिश कर रही है और चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम होंगे, क्योंकि मुस्लिम जैसे अल्पसंख्यक खतरे में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह से देश खंडित हो जाएगा... यह (दूसरा) सोवियत संघ बन जाएगा। जो सोवियत संघ के साथ हुआ, वही भारत में होगा।’’

बढ़ती बेरोजगारी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राजद के झा ने कहा कि भारत की आबादी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में इस चुनौती से निपटने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार में कोई भी दल हो सकता है, लेकिन बेरोजगारी हमारी राजनीति को खत्म कर देगी। हम रोजगार के अधिकार के बारे में क्या कर रहे हैं।’’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल, भाजपा के भुवनेश्वर कलिता, असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य, तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक, कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल और राजीव शुक्ला, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के के केशव राव, आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी, बीजू जनता दल की ममता मोहंता और तमिल मनीला कांग्रेस (एम) के जीके वासन ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।

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