देश की खबरें | दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण लागू होगी सम-विषम योजना, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

नयी दिल्ली, छह नवंबर दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने चार साल बाद फिर से सम-विषम नियम लागू करने की घोषणा की है, हालांकि इस नियम के प्रभावी होने को लेकर विशेषज्ञों की मिश्रित राय है।

इस नियम को पहली बार 2016 में लागू किया गया था।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को घोषणा की कि वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद के तौर पर शहर में 13 से 20 नवंबर तक सम-विषम योजना लागू की जाएगी।

साल 2016 में पहली बार लागू की गई इस योजना के तहत सम या विषम पंजीकरण संख्या वाली कारों को वैकल्पिक दिनों (एक दिन छोड़कर एक दिन) पर चलाने की अनुमति दी जाती है। अगले सप्ताह जब इसे लागू किया जाएगा तो यह चौथी बार होगा जब दिल्ली सरकार वाहनों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए यह योजना लागू करेगी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने इस नियम को 2016 में पहली बार जनवरी में लागू किया था और फिर उसके बाद इसे उसी वर्ष अप्रैल में लागू किया गया।

इस योजना के तहत आपातकालीन और पुलिस वाहनों, दोपहिया वाहनों, महिलाओं द्वारा चलाई जाने वाली कारों को छूट दी गई थी।

वर्ष 2019 में जब यह योजना नवंबर में लागू की गई थी, तो चिकित्सा आपातकालीन वाहनों और वर्दी में स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के साथ-साथ दोपहिया और इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट दी गई थी।

इसके अलावा इसमें अति विशिष्ट लोगों, केवल महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को ले जाने वाले वाहनों को भी छूट दी गई।

पर्यावरणविदों का कहना है कि इस नियम को लागू करने से प्रदूषण से निपटने में दीर्घकालिक स्तर पर लाभ नहीं मिलेगा बल्कि यह बढ़ते प्रदूषण से केवल कुछ दिनों की राहत दिलाएगी।

पर्यावरणविद ज्योति पांडे लवकरे ने पीटीआई- से कहा, ‘‘ हम इस जहरीली हवा में मर रहे हैं। पूरे साल प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहता है लेकिन दिल्ली में हमने खराब वायु गुणवत्ता को सामान्य बना दिया है और उसका राजनीतिकरण कर दिया है। ’’

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