कटक, 24 अक्टूबर ओडिशा उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) श्रेणी के आरक्षण को ''असंवैधानिक'' और ''मेधावी छात्रों के लिए बाधक'' करार दिया है जोकि कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से इन संस्थानों में प्रवेश के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और इस प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षकारों को एक बार फिर एनआरआई आरक्षण पर विचार करना चाहिए और इस कोटे को लागू करते समय एक उचित विनियमन तैयार करना चाहिए।
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न्यायमूर्ति संजू पांडा और न्यायमूर्ति एसके पाणिग्राही की खंडपीठ ने मंगलवार को कहा कि एनआरआई श्रेणी एक तरह का ''अभिजात्य वर्ग के लिए आरक्षण'' है।
पीठ ने कहा, '' हम यह मानने के लिए विवश हैं कि एनआरआई श्रेणी मेधावी उम्मीदवारों के लिए एक तरह की रूकावट है जोकि संयुक्त विधि प्रवेश परीक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए रात-दिन मेहनत करते हैं।''
अदालत ने कहा कि एनआरआई श्रेणी से संबंध रखने वाले ऐसे छात्र भी कभी-कभी प्रवेश पा जाते हैं, जिनकी रैंक काफी कम होती है जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाला सामान्य उम्मीदवार आरक्षण प्राप्त छात्र से पिछड़ जाता है और निराश हो जाता है।
उन्होंने कहा, '' यह अभिजात्य वर्ग के लिए आरक्षण प्रदान करने जैसा है और कोटे की यह दोहरी श्रेणी असंवैधानिक है। ''
खंडपीठ ने यह भी माना कि एनआरआई श्रेणी के अंतर्गत होने वाला चयन ''अनियमित, अवैध और मनमाना'' है।
अदालत ने इस प्रक्रिया से संबंधित सभी पक्षकारों विशेषकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि ऐसे एक समान और अच्छी तरह से परिभाषित मानंदड अपनाए जाएं ताकि मेधावी छात्रों को नुकसान नहीं हो।
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