देश की खबरें | दया याचिकाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिये दिशानिर्देशों की मांग वाली याचिका पर केन्द्र को नोटिस

नयी दिल्ली, 16 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने, मौत की सजा पाने वाले मुजरिमों को उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेने और दया याचिकाओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के लिये दिशानिर्देश बनाने की व्यवस्था देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर, बृहस्पतिवार को केन्द्र को नोटिस जारी किया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अधिवक्ता सुभाष विजयरण की याचिका पर वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से सुनवाई के दौरान केन्द्र और अन्य को नोटिस जारी किये।

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याचिका में प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे उनके पास लंबित दया याचिकाओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के साथ ही राष्ट्रपति तथा राज्यों के राज्यपालों को अपनी सिफारिशें भेजें।

याचिका में कहा गया है कि केन्द्र और राज्यों को मौत की सजा पाने वाले उन मुजरिमों के मामले में फैसले पर अमल के लिये आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाये जो अपने सभी कानूनी विकल्पों का सहारा ले चुके हैं।

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पीठ ने इस याचिका में उठाये गये मुद्दों पर विचार करने पर सहमति व्यक्त करते हुये इसे पहले से ही लंबित याचिका के साथ संलग्न करने का निर्देश दिया जिसमें इसी तरह के मुद्दे उठाये गये हैं।

पेश मामले में पांच बच्चों का अपहरण कर उनकी हत्या के दोषी उन दो मुजरिमों के मामले का उल्लेख किया गया है जिनकी मौत की सजा की पुष्टि उच्चतम न्यायालय ने कर दी थी लेकिन 2014 में उनकी सजा के अमल पर रोक लगाये जाने के कारण अब दया याचिका अस्वीकार करने में अत्यधिक विलंब के आधार पर मामला बंबई उच्च न्यायालय में लंबित है।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले 27 मई को इसी तरह की एक अन्य याचिका पर केन्द्र से जवाब मांगा था। इस याचिका में दया याचिकाओं के निस्तारण के लिये एक प्रक्रिया और समय सीमा निर्धारित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

न्यायालय ने उस समय कहा था कि वह गृह मंत्रालय में लबित दया याचिकाओं को राष्ट्रपति के समक्ष पेश करने की समय सीमा निर्धारित करने के बारे में विचार करेगा।

यह भी न्यायालय ने कहा था कि दया याचिका का प्रारूप नहीं बल्कि एक समय सीमा के भीतर इसका निस्तारण महत्वपूर्ण है।

अनूप

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