नयी दिल्ली, छह जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें यहां दो विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध मेडिकल कॉलेजों में दिल्ली राज्य कोटे की सीटों का दावा करने के लिए नीट (स्नातक) अभ्यर्थियों के पात्रता मानदंड को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, जीजीएसआईपीयू और डीयू को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवायी की तिथि 7 अगस्त तय की।
जीजीएसआईपीयू ने 28 जून को एक अधिसूचना जारी करके दिल्ली राज्य कोटा सीटों के लिए योग्य अभ्यर्थियों से दस्तावेज जमा करने के लिए कहा था, जो कुल सीटों का 85 प्रतिशत है।
नीट के एक अभ्यर्थी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता दिल्ली राज्य कोटा सीटों का दावा करने के लिए अनिवार्य पात्रता मानदंडों में से एक आवासीय मानदंड की कमी से व्यथित है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी के कॉलेज और संस्थानों में स्नातक पाठ्यक्रमों - एमबीबीएस/बीडीएस आदि में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड में किसी ऐसे स्कूल से कक्षा 11 और 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने तक ही सीमित है जो दिल्ली के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से संबद्ध हो।
याचिका में कहा गया है, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की अतार्किक और मनमानी आवश्यकता के परिणामस्वरूप दिल्ली के स्कूलों द्वारा दिल्ली के बाहर (मुख्य रूप से आसपास के राज्यों से) के छात्रों को अवैध रूप से 'डमी स्कूली शिक्षा' मंच प्रदान करने के लिए अवैध प्रथाओं का सहारा लिया जा रहा है, जो 10वीं की परीक्षा के बाद दिल्ली आ जाते हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य किसी तरह दिल्ली राज्य कोटा सीटों का लाभ उठाना है (जिसे अन्यथा दिल्ली के एनसीटी के वास्तविक निवासियों के बीच आवंटित किया जाना चाहिए)’’
अधिवक्ता आयुष बेओत्रा और अमीश टंडन के माध्यम से दायर याचिका में यहां एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कोटा का दावा करने के लिए छात्रों के लिए अनिवार्य पात्रता मानदंडों में से एक के रूप में निवास के मानदंड को शामिल करने का अनुरोध किया गया है।
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