विदेश की खबरें | कृषि सुधारों को लेकर भारतीय किसानों के चिंतित होने पर कोई हैरानी की बात नहीं: अमेरिकी सांसद

वाशिंगटन, नौ दिसंबर अमेरिका के एक शीर्ष सांसद ने भारत में नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी के बीच इस बात में हैरानी नहीं है कि भारत के किसान कृषि सुधारों के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

पंजाब, हरियाणा और अन्य कुछ राज्यों के हजारों किसान 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं और सितंबर में लागू तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

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मोदी सरकार का कहना है कि नये कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे और खेती में नयी तकनीक आएगी।

भारत और भारतीय अमेरिकियों पर अमेरिकी सांसदों के समूह (कॉकस) के सह-अध्यक्ष ब्रैड शरमान ने कहा, ‘‘वैश्विक महामारी के बीच यह हैरानी की बात नहीं है कि भारत के किसान हालिया कृषि सुधारों के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। जैसा हम अमेरिका में अपने अनुभव से जानते हैं कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है और उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’

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उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कॉकस का अध्यक्ष होने के नाते मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के बीच करीबी साझेदारी को प्रोत्साहित किया है। यह साझेदारी हितों और मूल्यों पर आधारित है जिसमें मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी के प्रति साझा समर्पण है।’’

भारत ने किसानों के प्रदर्शन पर विदेशी नेताओं और राजनेताओं के बयानों को ‘‘आधी-अधूरी जानकारी पर आधारित’’ तथा ‘‘अवांछित’’ करार दिया है। उसका कहना है कि ये विषय एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामला है।

नवनिर्वाचित सांसद डेविड जी वलाडाओ ने भी भारतीय किसानों का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो भारत सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों को इकट्ठा होने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने दे।’’

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