जयपुर, 18 जुलाई राजस्थान सरकार की विभिन्न भर्तियों में जिला स्तरीय मेरिट बनाने एवं स्थानीय अभ्यर्थियों को वरीयता दिए जाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी गई।
विधानसभा में मंगलवार को अनेक विधेयक पेश किए गए और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर हंगामा किया।
प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने एक जवाब में कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न भर्तियों में जिला स्तरीय मेरिट बनाने एवं स्थानीय अभ्यर्थियों को वरीयता दिए जाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 16(2) के अनुसार स्थानीय निवास के आधार पर सार्वजनिक नियोजन में वरीयता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 30 जुलाई 2002 के एक फैसले के बाद से शिक्षा विभाग में जिलेवार भर्तियां बंद कर दी गईं। उन्होंने कहा कि हालांकि पुलिस में कतिपय पदों पर जिला वार भर्ती की जाती है।
डॉ. कल्ला द्वारा जवाब देने के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस व्यवस्था के कारण प्रदेश के जनजाति उपक्षेत्र (टीएसपी) के जिलों में पदों के खाली रहने तथा अन्य कई जिलों में सभी पद भरे रहने सहित अन्य विसंगतियां सामने आ रही है। उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को उच्चतम न्यायालय के उक्त फैसले के आलोक में इस नीति की पुनः समीक्षा करने एवं प्रदेश हित में उचित निर्णय करने का सुझाव दिया। इस पर शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया कि इस संबंध में कार्मिक विभाग से जरूर चर्चा की जायेगी।
इस विषय पर चर्चा के दौरान निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा बीच में बोलने लगे तो विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने नाराजगी जताते हुए उन्हें आगाह किया। बीच में कुछ और सदस्यों के बोलने से सदन में हंगामे की स्थिति हो गई, हालांकि बाद में प्रश्नकाल नियमित चला।
वहीं शून्यकाल के दौरान किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ। उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनियां ने यह मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के जन घोषणा पत्र का उल्लेख किया। इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई मंत्रियों-विधायकों ने आपत्ति जताई। इस पर दोनों पक्षों में नोक-झोंक शुरू हो गई और सदन में हंगामा होने लगा। भाजपा विधायकों ने आसन के सामने आकर नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप से माहौल शांत हुआ।
वहीं सरकार की ओर से राजस्थान कारागार विधेयक – 2023 सहित कई विधेयक मंगलवार को विधानसभा में रखे गए और पारित किए गए।
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