इस्लामाबाद, पांच फरवरी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के दावों के विपरीत सुरक्षा सूत्रों ने खुलासा किया है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का कोई पत्र सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल असीम मुनीर को नहीं मिला है। मीडिया में बुधवार को आई खबरों से यह जानकारी मिली।
विवाद तब शुरू हुआ जब पीटीआई के अध्यक्ष गौहर अली खान और खान के वकील फैसल चौधरी ने सोमवार को मीडियाकर्मियों को बताया कि पीटीआई संस्थापक ने सेना प्रमुख को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनसे ‘‘नीति का पुनर्मूल्यांकन करने’’ का आग्रह किया गया है।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार के अनुसार, मामले से अवगत सूत्रों ने बताया कि खान के पत्र के बारे में खबर सैन्य नेतृत्व तक मीडिया के माध्यम से पहुंची, न कि किसी औपचारिक संचार के माध्यम से।
इसके अलावा, ‘डॉन’ अखबार ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा कि सेना को यह पत्र नहीं मिला है। उन्होंने इस तरह के किसी पत्र के मिलने की खबरों को भी खारिज कर दिया।
सुरक्षा सूत्रों ने आरोप लगाया कि पीटीआई नेतृत्व ने एक और ‘‘तमाशा’’ किया है और सुझाव दिया कि अगर पार्टी बातचीत करने में रुचि रखती है तो उसे सैन्य प्रतिष्ठान के बजाय नेताओं से संपर्क करना चाहिए। ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ऐसा कोई पत्र मिलता है तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, इस बीच रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अडियाला जेल के बाहर खान के वकील चौधरी ने विस्तार से बताया कि खान ने पीटीआई सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में जनरल मुनीर को छह-सूत्री पत्र भेजा था।
उन्होंने बताया कि पत्र में खान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सेना के साथ एकजुटता जताई थी, सैनिकों के बलिदान को मान्यता दी। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सशस्त्र बलों के लिए समर्थन का भी आह्वान किया।
चौधरी के अनुसार, पत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे, जिसमें ‘‘फर्जी चुनाव’’ और मौजूदा सरकार में कथित तौर पर धन शोधन करने वालों को बढ़ावा दिए जाने के मुद्दे पर प्रकाश डाला गया।
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