नयी दिल्ली, तीन मार्च तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि वह पांच मार्च को राज्य भर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रस्तावित ‘रूट मार्च’ और जनसभाओं की अनुमति देने के पूरी तरह खिलाफ नहीं है, हालांकि राज्य सरकार ने खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश के हर गली, नुक्कड़ में आयोजित करने नहीं दिया जा सकता।
राज्य सरकार ने मार्च के लिए मार्गों की सूची तैयार करने के लिए न्यायालय से कुछ समय मांगा।
राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी का अनुरोध स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने सुनवाई 17 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
रोहतगी ने दलील दी कि राज्य सरकार मार्गों को तय करने का प्रयास करेगी और एक समाधान निकालेगी।
उन्होंने कहा, "विचार जुलूसों पर प्रतिबंध लगाने का नहीं, बल्कि इसके लिए कुछ शर्तें होनी चाहिए।"
आरएसएस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि राज्य ने 'दलित पैंथर्स' जैसे संगठनों द्वारा इसी तरह के आयोजनों की अनुमति दी है, लेकिन आरएसएस के साथ कठोर रवैया अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस को छह जिलों में मार्च निकालने की अनुमति दी गई थी, और संघ ने इस पर अमल किया। हालांकि, इसे 42 स्थानों पर बंद जगहों में आयोजन करने को कहा गया था।
जेठमलानी ने कहा, ‘‘जिन क्षेत्रों में हमें अनुमति दी गई थी, हम वहां आगे बढ़े और कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा नहीं हुई। अब, वे कहते हैं कि पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है और यह (आरएसएस के आयोजनों के लिए) खतरा है। वे एक आतंकवादी संगठन को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं और इसीलिए वे हम पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। मैं अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता। क्या यह एक आधार हो सकता है?"
जेठमलानी ने कहा कि आरएसएस पांच मार्च को वैसे भी जुलूस नहीं निकालने जा रहा है और अगर राज्य सरकार को समय चाहिए, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा, "यदि मेरे दोस्त चाहते हैं, तो हम कम से कम 10 या 12 मार्च तक कुछ भी नहीं करने जा रहे हैं।"
रोहतगी ने जोर देकर कहा कि कोई भी यह नहीं कह सकता कि राज्य की हर गली में जुलूस निकालने का उनका निहित अधिकार है और राज्य की याचिका को तकनीकी आधार पर बंद नहीं किया जा सकता।
राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में कहा है कि रूट मार्च से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होगी और इसने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।
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