पटना, नौ अगस्त नीतीश कुमार जिन्हें कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता था, ने मंगलवार को प्रदेश के विपक्षी महागठबंधन का नेता चुने जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ लिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात कर आठवीं बार राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव क्रमशः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ बुधवार दोपहर दो बजे लेंगे।
शपथ ग्रहण राजभवन के भीतर अपराह्न दो बजे एक सादे समारोह में होगा।
कुमार के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और यादव के राजद सूत्रों ने कहा कि बाद में दो सदस्यीय मंत्रिमंडल में और मंत्रियों को शामिल किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार नए मंत्रिमंडल में जदयू के अलावा राजद और कांग्रेस के प्रतिनिधि होंगे। वाम दलों द्वारा अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने के लिए नई सरकार को बाहर से समर्थन देने की संभावना है।
भाजपा नीत राजग को छोड कुमार आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वह सात दलों के गठबंधन जिसे एक निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है, का नेतृत्व करेंगे।
नीतीश कुमार (71 वर्षीय) ने मंगलवार को राज्यपाल से दो बार मुलाकात की। पहली बार राजग गठबंधन का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में अपना इस्तीफा सौंपा जबकि दूसरी बार तेजस्वी सहित विपक्षी महागठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ राजभवन जाकर राज्यपाल को 164 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी।
बिहार विधानसभा में इस समय 242 सदस्य हैं और बहुमत हासिल करने का जादुई आंकड़ा 122 है।
इससे पूर्व तेजस्वी सहित अपने अन्य सहयोगियों के साथ राजभवन से बाहर निकलने पर कुमार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘पार्टी की बैठक में यह तय हुआ कि हमें राजग छोड़ देना चाहिए। इसलिए, मैंने राजग के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।’’
जाति जनगणना, जनसंख्या नियंत्रण और अग्निपथ योजना और कुमार के पूर्व विश्वासपात्र आरसीपी सिंह को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में बनाए रखने सहित कई मुद्दों पर जदयू और भाजपा के बीच हफ्तों तक तनाव रहा। मंगलवार की सुबह इस क्षेत्रीय दल के सभी सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में राजग छोड़ने और महागठबंधन के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया। जदयू पांच साल पहले यानी 2017 में महागठबंधन से अलग हुआ था।
समझा जाता है कि मुख्यमंत्री ने पार्टी विधायकों और सांसदों से कहा था कि भाजपा जिसने पहले चिराग पासवान के विद्रोह और बाद में पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के माध्यम उनकी जदयू को कमजोर करने की कोशिश की।
कुमार की स्पष्ट सहमति के बिना सिंह को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। नतीजतन जब राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ तो जदयू ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के तौर पर एक और कार्यकाल देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण कैबिनेट मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।
इसके बाद सिंह के समर्थकों द्वारा जदयू में विभाजन की अफवाहें सामने आईं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा -माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-’ को फोन पर बताया कि जदयू और भाजपा के बीच विवाद भगवा पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा के हालिया बयान से भी गहरा हुआ, जिन्होंने कहा था कि क्षेत्रीय दलों का कोई भविष्य नहीं है।
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