देश की खबरें | एनआई ने तृणमूल कांग्रेस नेता छत्रधर महतो से दो मामलों में पूछताछ की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

झारग्राम (पश्चिम बंगाल), 28 अगस्त तृणमूल कांग्रेस नेता एवं माओवादी समर्थक ‘पीसीएपीए’ के पूर्व संयोजक छत्रधर महतो से शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 11 साल पुराने दो मामलों में पूछताछ की। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एनआईए के अधिकारियों की एक टीम ने महतो से ट्रेन हाईजैक और माकपा के एक नेता की हत्या के करीब एक दशक पुराने मामलों में सलबोनी सीआरपीएफ शिविर में पूछताछ की।

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महतो जुलाई में तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश समिति में शामिल किये गये थे और उन्हें जंगल महल क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका सौंपी गई।

महतो (57) ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर में प्रवेश करने से पहले कहा, ‘‘मैं सलबोनी से झारग्राम एनआईए अधिकारियों से मिलने आया हूं, जिन्होंने 11 साल पुराने दो मामलों में मुझे तलब किया है। मैं उनसे सहयोग करूंगा। इससे पहले उनहोंने कोलकाता में मुझे तलब किया था लेकिन मैं कोविड-19 महामारी के कारण उपस्थित नहीं हो सका था। ’’

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तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘भाजपा एक दशक पहले के झूठे मामलों में एनआईए का इस्तेमाल कर मेरा भयादोहन कर रही है। मैं उसकी साम्प्रदायिक राजनीति का विरोध करता रहूंगा। ’’

महतो लालगढ़ आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे। यह आंदोलन ‘पुलिस अत्याचार के खिलाफ जन समिति’ (पीसीएपीए) ने चलाया था और इसे 2000 के दशक के आखिरी वर्षों में माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। वह उन आरोपियों में शामिल हैं, जिन्होंने जंगल महल में माकपा के एक नेता की हत्या की थी।

अक्टूबर 2009 में नयी दिल्ली जा रही भुवनेश्वर-राजधानी एक्सप्रेस को झारग्राम स्टेशन पर पांच घंटे के लिये हाईजैक करने के मामले में भी वह नामजद हैं।

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में दो नवंबर 2008 को पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य पर जानलेवा हमले की कोशिश करने के आरोप में महतो को पुलिस ने मौजूदा झारग्राम जिले से 26 सितंबर 2009 में गिरफ्तार किया था।

महतो के जेल में अच्छे आचरण को ध्यान में रखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी उम्र कैद की सजा घटा कर 10 साल कर दी थी, जिसके बाद इस साल फरवरी में वह रिहा हुए।

महतो माओवादियों की कथित गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में नामजद हैं। उनके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत आरोप दर्ज है।

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