भुवनेश्वर, 28 मार्च राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यहां ‘कलिंगा औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान’ (केआईआईटी) में नेपाल की 20-वर्षीय छात्रा की कथित आत्महत्या के मामले में अधिकारियों की घोर लापरवाही पाते हुए ओडिशा सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है।
एनएचआरसी ने नेपाली छात्रा प्रकृति लमसाल की मौत के मामले की जांच करने के लिए एक दल भेजा था। एनएचआरसी ने 27 मार्च को मामले की स्थिति रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड करते हुए कहा कि मानवाधिकार आयोग ने ओडिशा के मुख्य सचिव, खुर्दा के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और यूजीसी एवं एनएएसी के अध्यक्षों से रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने कहा कि दौरे के दौरान एनएचआरसी टीम ने पाया कि मृतका ने 16 फरवरी, 2025 को यह चरम कदम उठाने से महीनों पहले 12 मार्च, 2024 को केआईआईटी के 'इंटरनेशनल रिलेशन ऑफिस (आईआरओ)' में शिकायत दर्ज कराई थी।
आयोग ने कहा कि उसने इंजीनियरिंग के एक छात्र का नाम लिया है जिसने कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल किया था।
मानवाधिकार समिति की स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है, "आईआरओ और विश्वविद्यालय के अधिकारियों/अनुशासन समिति और कॉलेज प्राधिकारियों का आचरण यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उनकी (आईआरओ और विश्वविद्यालय प्राधिकारियों की) ओर से घोर लापरवाही और चूक हुई है, जिसे आत्महत्या के लिए उकसाने के कृत्य के रूप में माना जा सकता है...जिसके परिणामस्वरूप अंततः छात्रा ने आत्महत्या कर ली।"
रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि 17 फरवरी 2025 (लड़की की मौत के एक दिन बाद) लगभग 1,000-1,100 छात्रों ने अपने छात्रावास छोड़ दिए, जबकि लगभग 180 छात्राओं ने इतनी जल्दबाजी में अपने छात्रावास छोड़े कि कोई भी अप्रिय घटना घट सकती थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं की और उन्हें परिसर से बाहर निकाल दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने अपनी गलती स्वीकारने के बजाय आरोपों को नकारा और यहां तक कि यह भी कहा कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय का यह जवाब न केवल असंवेदनशील है, बल्कि इसमें अहंकार भी झलकता है।
मानवाधिकार आयोग ने निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए ओडिशा के मुख्य सचिव, खुर्दा के जिला अधिकारियों, पुलिस आयुक्त और यूजीसी एवं एनएएसी के अध्यक्षों से रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने ओडिशा के मुख्य सचिव और खुर्दा के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया।
इसके अलावा मानवाधिकार आयोग ने यूजीसी से अपने दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के लिए केआईआईटी और केआईएसएस के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई शुरू करने पर विचार करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
एनएएसी के अध्यक्ष को मामले की जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
आयोग ने कहा, "रिपोर्ट चार सप्ताह (27 मार्च, 2025 से) के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए।"
विश्वविद्यालय में 16 फरवरी को छात्रा का शव छात्रावास के कमरे में लटका मिला था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले नेपाल के छात्रों पर हमला किया गया था और उन्हें जबरन बाहर निकाल दिया गया था।
इस घटना से देश भर में आक्रोश फैल गया था और नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी मामले में हस्तक्षेप किया था।
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