देश की खबरें | एनजीटी ने सभी राज्यों से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, समितियों में कर्मचारियों की संख्या की जानकारी मांगी

नयी दिल्ली, 28 नवंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा प्रदूषण नियंत्रण समितियों में कर्मचारियों की वास्तविक संख्या के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अधिकरण ने पर्यावरण प्रयोगशालाओं में बुनियादी ढांचे के संबंध में भी रिपोर्ट मांगी।

एनजीटी एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने मीडिया में आई इस खबर पर स्वत: संज्ञान लिया है कि देशभर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास कार्य करने के लिए संसाधन नहीं हैं।

खबर में कर्मियों की अपर्याप्त स्वीकृत संख्या, विशेष रूप से तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां और उचित प्रशिक्षण के अभाव जैसी चीजों का जिक्र किया गया था।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने हाल में एक आदेश में कहा, "यह खबर पर्यावरण कानूनों के अनुपालन को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है।"

पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पर्याप्त संख्या में कर्मचारी न होने से संबंधित खबर सही है।

इसने कहा कि खबर में देश के 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों में कर्मचारियों की कमी का खुलासा किया गया है।

पीठ ने कहा, "11,969 स्वीकृत पदों में से केवल 5,877 (देशभर में) भरे हुए हैं और गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/प्रदूषण नियंत्रण समितियों में कर्मचारियों की संख्या स्वीकृत संख्या के आधे से भी कम है।''

इसने कहा कि कुछ राज्यों में उचित रूप से मान्यता प्राप्त पर्यावरण प्रयोगशालाओं का अभाव है, जबकि कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत ये प्रयोगशालाएँ स्थापित भी नहीं हैं।

पीठ ने संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि इसमें कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या एवं वर्तमान संख्या, प्रशासनिक, मंत्रालयी और तकनीकी कर्मचारियों का अनुपात तथा उनके विनियमन एवं निगरानी सुविधाओं का ब्योरा हो।

मामले में अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)