देश की खबरें | गाजियाबाद में सड़कों के किनारे कंक्रीट के फुटपाथ को लेकर एनजीटी ने नोटिस जारी किया

नयी दिल्ली, चार अगस्त राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और अन्य से गाजियाबाद में सड़कों के किनारे ‘‘बिना सोचे-समझे’’ कंक्रीट के फुटपाथ का निर्माण करने तथा पार्कों में निर्माण को लेकर दायर याचिका पर जवाब मांगा है।

अधिकरण एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि ‘‘बड़े पैमाने पर, बिना सोचे-समझे और अंधाधुंध तरीके से कंक्रीट निर्माण या फुटपाथ बनाया जाना शहरों और कस्बों में जलजमाव, शहरी बाढ़ और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने का सबसे बड़ा कारण है।’’

हाल में जारी अपने आदेश में अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि याचिका में ‘‘पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है।’’

पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं। पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले की आगे की कार्यवाही के लिए 21 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की।

मामले के प्रतिवादियों या पक्षकारों में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए), गाजियाबाद नगर निगम और अन्य शामिल हैं।

अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर याचिका में रेखांकित किया गया है कि हरित क्षेत्रों में इस प्रकार का निर्माण कार्य पर्यावरण नियमों, सरकारी दिशानिर्देशों और अधिकरण के आदेशों तथा निर्णयों का ‘‘घोर उल्लंघन’’ है।

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