नयी दिल्ली, 13 फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नोएडा प्राधिकरण को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में शोधित जल का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) द्वारा एसटीपी से शोधित जल को सिंचाई व अन्य गैर-पेय प्रयोजनों के लिए उपयोग करने के बजाय नालों में बहाए जाने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने छह फरवरी को पारित आदेश में उल्लेख किया कि नोएडा प्राधिकरण ने एक जवाब दाखिल कर कहा था कि वह विभिन्न एसटीपी से प्रतिदिन 26 करोड़ लीटर (एमएलडी) शोधित जल उत्पन्न कर रहा है, जिसमें से 192 एमएलडी का उपयोग नहीं किया जा रहा और इसे नालियों में बहाया जा रहा है।
पीठ ने कहा, “नोएडा प्राधिकरण के वकील ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि एसटीपी-शोधित जल का लगभग 20 प्रतिशत वर्तमान में उपयोग किया जा रहा है और शेष को नाले में बहा दिया जाता है।”
अधिकरण ने पाया कि एसटीपी-शोधित जल का उपयोग विभिन्न परियोजनाओं में किया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक जल संसाधनों को बचाने में मदद मिलेगी।
एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण को एसटीपी-शोधित जल का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने तथा चार सप्ताह के भीतर पूर्ण उपयोग के लिए समय-सीमा सहित एक व्यापक योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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