नयी दिल्ली, 12 मई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार के सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक विशेष खाते (रिंग-फेस) में 200 करोड़ रुपये जमा करने की अनुमति दिए जाने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।
एनजीटी द्वारा ठोस और तरल कचरे का ठीक से प्रबंधन नहीं करने के लिए राज्य पर 200 करोड़ रुपये के जुर्माने की घोषणा के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने यह अनुरोध किया।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की पीठ ने कहा कि पैदा होने वाले सीवेज और उपचारित मात्रा में लगभग छह करोड़ लीटर प्रति दिन का अंतर है। इसके अलावा प्रति दिन 252.65 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है।
पीठ में न्यायिक सदस्यों न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी एवं विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल और अफरोज अहमद भी शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव ने हलफनामा दिया है कि 200 करोड़ रुपये राज्य के पास आसानी से उपलब्ध है और उसे अलग किया जाएगा और उसका उपयोग विशेष रूप से सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए किया जाएगा।
पीठ ने राज्य के अनुरोध को स्वीकार कर लिया और कहा कि मुख्य सचिव महीने में कम से कम एक बार प्रगति की समीक्षा करेंगे और कचरा प्रबंधन में सत्यापन योग्य प्रगति के साथ अर्धवार्षिक रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
एनजीटी के अन्य निर्देशों में नौ प्रमुख अपशिष्ट स्थलों पर कचरे का तत्काल प्रबंधन और मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) के मुद्दों को हल करना शामिल है।
एनजीटी अन्य पर्यावरणीय मुद्दों के साथ ही राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2016 के अनुपालन की निगरानी कर रहा है।
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