देश की खबरें | नई दिल्ली घोषणापत्र ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनेगा : भारत

नयी दिल्ली, आठ सितंबर जी20 शिखर सम्मेलन की शनिवार को शुरुआत से पहले मेजबान भारत ने शुक्रवार को कहा कि ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेयरेशन’ ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) और विकासशील देशों की आवाज बनेगा।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वास जताया कि जी20 सम्मेलन मानव-केंद्रित और समावेशी विकास की दिशा में नया मार्ग प्रशस्त करेगा।

जी20 से जुड़े भारत के शीर्ष अधिकारियों ने सम्मेलन से पहले प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें आम-सहमति से एक संयुक्त घोषणापत्र तैयार किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और जलवायु संबंधित मुद्दों जैसे जटिल विषयों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा।

शनिवार से शुरू होने जा रहे सम्मेलन के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जी20 समूह के सदस्य देशों के अन्य नेता राजधानी पहुंच गये हैं।

इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक जैसे संस्थानों के प्रमुख भी यहां पहुंचे हैं।

इन नेताओं का स्वागत परंपरागत नृत्य प्रस्तुतियों के साथ किया गया। आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टलिना जॉर्जीवा भी हवाईअड्डे पर संगीत की थाप पर मुस्कराते हुए कुछ देर थिरकीं।

राष्ट्रीय राजधानी में, खासतौर पर नई दिल्ली जिले में सुरक्षा चाक-चौबंद है।

प्रगति मैदान स्थिति ‘भारत मंडपम’ में होने वाले सम्मेलन के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

भारत पहली बार 19 देशों और यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह समूह दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेयरेशन’ ‘ग्लोबल साउथ ’ (वैश्विक दक्षिण) और विकासशील देशों की आवाज बनेगा।

कांत ने कहा, ‘‘हमारा ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेयरेशन’ लगभग तैयार है। मैं इस बारे में विस्तार से बात नहीं करूंगा क्योंकि इसे सम्मेलन के दौरान नेताओं को सौंपा जाएगा और उनकी सहमति के बाद हम इस घोषणापत्र की वास्तविक उपलब्धियों के बारे में बात कर पाएंगे।’’

विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने नई दिल्ली घोषणापत्र पर समझौते में यूक्रेन मुद्दे के कारण रूकावट संबंधी सवाल के जवाब में कहा, ‘‘भारत को उम्मीद है कि जी20 के सभी सदस्य आम-सहमति की ओर बढ़ेंगे।’’

जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किये जाने की संभावना पर क्वात्रा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सम्मेलन में इस पर उचित फैसला लिया जाएगा।

सम्मेलन से पहले सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष के उल्लेख को लेकर पश्चिम देशों और रूस-चीन के बीच मतभेदों के मद्देनजर क्या एक संयुक्त वक्तव्य सामने आएगा।

जी20 आम-सहमति के सिद्धांत के तहत काम करता है और समान राय नहीं बनने पर आशंका है कि बिना घोषणापत्र स्वीकार किये सम्मेलन समाप्त हो जाए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने उम्मीद जताई कि भारत की जी20 की अध्यक्षता ऐसे क्रांतिकारी बदलाव लाने में कारगर होगी जिनका दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही है।

उन्होंने बंटे हुए विश्व में बढ़ते विभाजन और कम होते विश्वास के खिलाफ भी आगाह किया।

जी20 सम्मेलन से पहले यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जी20 की थीम के रूप में भारत द्वारा अपनाया गया ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का सूत्रवाक्य महाउपनिषद से प्रेरित है और उसमें आज की दुनिया की प्रतिध्वनि है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम वास्तव में एक वैश्विक परिवार हैं, तो आज हमें ऐसा दिखना चाहिए, न कि हम निष्क्रिय दिखें।’’

गुतारेस ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि भारत की जी20 की अध्यक्षता उस तरह के क्रांतिकारी बदलाव को आगे बढ़ाने में मदद करेगी जिसकी हमारी दुनिया को सख्त जरूरत है, जो ‘ग्लोबल साउथ’ की ओर से कार्य करने की भारत की बार-बार की प्रतिबद्धताओं और विकासात्मक एजेंडे को आगे बढ़ाने के उसके दृढ़ संकल्प के अनुरूप हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विभाजन बढ़ रहे हैं, तनाव बढ़ रहे हैं और विश्वास कम हो रहा है। ये सब मिलकर अंतत: टकराव को बढ़ावा देते हैं।’’

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, ‘‘दुनिया परिवर्तन के मुश्किल दौर में है और इसका भविष्य बहुध्रुवीय है, लेकिन हमारे बहुपक्षीय संस्थानों में गुजरे जमाने की झलक मिलती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक वित्तीय ढांचों में गहन सुधारों की जरूरत है और यही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बारे में भी कहा जा सकता है।’’

रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि उन्हें इस बात की बहुत उम्मीद नहीं है कि इस पर निकट भविष्य में कोई शांति समाधान निकल पाएगा।

सम्मेलन में विचार-विमर्श के दौरान ब्रिटेन के एजेंडे में रूस-यूक्रेन संघर्ष को प्रमुख मुद्दे के रूप में रेखांकित किया गया है। ब्रिटेन ने कहा है कि भारत की भूमिका और प्रभाव इस लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सुनक के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन को लेकर अपना समर्थन दिखाने के लिए ‘‘हर अवसर’’ का उपयोग करेगा और साथ ही वैश्विक समर्थन को भी बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘मानवाधिकारों और वास्तव में लोकतंत्र पर रूस के हमले को रोकने में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम पुतिन के क्रूर आक्रमण को समाप्त करने के लिए उस प्रभाव का उपयोग करने को लेकर उन्हें प्रोत्साहित करने के वास्ते मोदी या अन्य नेताओं के साथ बैठकें करेंगे।’’

क्या जी20 में यूक्रेन संघर्ष को लेकर मतभेदों के मद्देनजर नेताओं का घोषणापत्र जारी किया जा सकेगा, इस बारे में पूछे जाने पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने कहा कि इस पर अभी बातचीत चल रही है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि सात औद्योगिक अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह (जी7) भारत पर दबाव डालकर प्रयास कर रहा है कि जी20 सम्मेलन के अंतिम दस्तावेजों में यूक्रेन की स्थिति पर उनका एकपक्षीय रुख झलके।

प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए ‘एक्स’ पर कहा कि वंचितों, समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों की सेवा करने के उनके मिशन का अनुकरण करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रगति के मानव-केंद्रित तरीके पर भारत के जोर को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश के सांस्कृतिक लोकाचार में निहित, भारत की जी20 अध्यक्षता का विषय 'वसुधैव कुटुम्बकम- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' हमारे वैश्विक दृष्टिकोण के साथ गहराई से मेल खाता है कि पूरा विश्व एक परिवार है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की जी20 अध्यक्षता समावेशी, महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई-उन्मुख रही है। हमने सक्रिय रूप से ग्लोबल साउथ की विकास संबंधी चिंताओं को उठाया।’’

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