जरुरी जानकारी | घरेलू संभावनाओं का लाभ उठाने के लिये एल्युमीनियम आयात पर अंकुश लगाने की जरूरत: एफआईएमआई

नयी दिल्ली, 21 अगस्त खनन उद्योग के संगठन एफआईएमआई ने शुक्रवार को कहा कि सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिये देश में एल्यूमीनियम आयात पर अंकुश लगाने तथा समृद्ध और अक्षय माने जाने वाले घरेलू संसाधनों के दोहन के लिये स्थानीय कंपनियों को प्रोत्साहन दिये जाने की जरूरत है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (एफआईएमआई) के उपाध्यक्ष आर एल मोहंती ने एक वेबिनार में कहा कि वित्त वर्ष 2031-32 तक एल्युमीनियम की घरेलू खपत एक करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए, भारत को बॉक्साइट का उत्पादन वित्तवर्ष 2018- 19 के 2.30 करोड़ टन से बढ़ाकर लगभग सात करोड़ टन तथा एल्युमिना का उत्पादन 74 लाख टन से बढ़ाकर दो करोड़ टन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

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उन्होंने कहा कि भारत के पास ‘‘बॉक्साइट के भरपूर भंडार’’ मौजूद है जो एल्यूमीनियम के उत्पादन के लिए मुख्य कच्चा माल है।

मोहंती ने कहा, ‘‘हालांकि, घरेलू मांग और पर्याप्त घरेलू एल्युमीनियम क्षमता होने के बावजूद, देश में खपत का 60 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा खर्च में वृद्धि हुई है ... घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एल्यूमीनियम के बढ़ते आयात को प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है।’’

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इसके साथ ही, बॉक्साइट के लिए खनन व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने के लिए, देश में पहले से ही संचालित एल्यूमीनियम उद्योग को कोयला ब्लॉक आवंटन सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने यह बात 'भारतीय बॉक्साइट और आत्मनिर्भर भारत के लिए एल्यूमीनियम उद्योग' पर आयोजित वेबिनार में कही।

भारत एल्यूमीनियम उत्पादन के मामले में विश्व का एक प्रमुख देश है, जिसकी दूसरी सबसे बड़ी उत्पादन क्षमता है।

बॉक्साइट के अधिकांश संसाधन ओडिशा और आंध्र प्रदेश में पूर्वी तट केंद्रित हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे अन्य राज्यों में यह पाया जाता हैं।

उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी आवश्यकता को पूरा करने में आत्मनिर्भर हो सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बॉक्साइट बाजार में उसके एक प्रमुख देश बनकर उभरने की बहुत बड़ी संभावना है।

राजेश

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