नयी दिल्ली, 14 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सामाजिक सशक्तीकरण में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन होंगे और देश में बड़ा बदलाव दिखाई देगा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने 77वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा वह स्वयं एक शिक्षक रही हैं, इस नाते वह समझती हैं कि शिक्षा समाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बदलाव आना शुरू हो गया है तथा ‘‘विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के साथ मेरी बातचीत से यह पता चला कि अध्ययन की प्रक्रिया अधिक लचीली हो गई है।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘इस दूरदर्शी नीति का एक प्रमुख उद्देश्य प्राचीन मूल्यों को आधुनिक कौशल के साथ जोड़ना है। इससे आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन होंगे और परिणामस्वरूप देश में एक बहुत बड़ा बदलाव दिखाई देगा।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत की प्रगति से देशवासियों खासकर युवा पीढ़ी के सपनों को शक्ति मिलती है।’’
उन्होंने कहा कि विकास की अनंत संभावनाएं देशवासियों की प्रतीक्षा कर रही हैं तथा स्टार्टअप से लेकर खेलकूद तक हमारे युवाओं ने उत्कृष्टता के नए आसमानों में उड़ान भरी है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘आज के नए भारत की महत्वाकांक्षाओं के नए क्षितिज असीम हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नई ऊंचाइयों को छू रहा है और उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस वर्ष इसरो ने चंद्रयान-3 प्रक्षेपित किया है जो चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के अनुसार उसका ‘विक्रम’ नामक लैंडर तथा ‘प्रज्ञान’ नामक रोवर अगले कुछ ही दिनों में चंद्रमा पर उतरेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हम सभी के लिए वह गौरव का क्षण होगा और मुझे भी उस पल का इंतजार है। चंद्रमा का अभियान अंतरिक्ष के हमारे भावी कार्यक्रमों के लिए केवल एक सीढ़ी है। हमें बहुत आगे जाना है।’’
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अभियान में ही नहीं बल्कि धरती पर भी हमारे वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीविद देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मुर्मू ने कहा कि अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपये के साथ सरकार द्वारा अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह फाउंडेशन हमारे कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों में शोध और विकास को आधार प्रदान करेगा, उन्हें विकसित करेगा और आगे ले जाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ हमारे देश ने नए संकल्पों के साथ ‘अमृत काल’ में प्रवेश किया है तथा हम भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आइए हम सभी अपने संवैधानिक मूल कर्तव्यों को निभाने का संकल्प लें ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हम व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें ताकि हमारा देश निरंतर उन्नति करते हुए कर्मठता तथा उपलब्धियों की नई ऊंचाइयां हासिल करे।’’
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