नागपुर, 20 जून नागपुर नगर निकाय के प्रमुख तुकाराम मुंढे शनिवार को एक कांग्रेस पार्षद द्वारा उनको निशाना बनाकर एक आपत्तिजनक बयान दिए जाने के बाद नगर निगम की बैठक से बाहर निकल गए।
कांग्रेस के एक अन्य पार्षद द्वारा मुंढे के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को महापौर ने खारिज कर दिया।
नागपुर नगर निगम में भाजपा का शासन है।
बैठक के दौरान, कांग्रेस पार्षद हरीश ग्वालबंशी ने मुंढे के एक फैसले पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने अपने वार्ड में एक जमीन पर कोविड-19 देखभाल केंद्र स्थापित करने की अनुमति दे दी। वह जमीन किसी अन्य कार्य के लिए है।
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इस कदम का विरोध करते हुए ग्वालबंशी ने कहा कि मुंढे ने एक तानाशाह की तरह व्यवहार किया और लोगों या चुने हुए प्रतिनिधियों की बात नहीं मानी। ग्बालबंशी ने कहा कि उनका नाम एक आदरणीय संत के नाम से मिलता है जो उचित नहीं है।
मुंढे ने उनके बयान पर आपत्ति जताई और बैठक से बाहर निकल गए और महापौर संदीप जोशी द्वारा आग्रह किये जाने पर भी बैठक में वापस आने से इनकार कर दिया।
शिवसेना के पार्षदों मंगला गावरे और नितिन साठावणे ने मुंढे के निकाय प्रमुख के रूप में कार्य करने के तरीके पर आपत्ति जताई। उसके बाद कांग्रेस पार्षद संजय महाकालकर ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करना चाहा, जिसे जोशी ने खारिज कर दिया। जोशी ने निगम की बैठक को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
इस बीच, मुंढे के समर्थन में कांग्रेस के एक पार्षद बंटी शेलके एक बैनर के साथ नगर निकाय के बाहर खड़े थे।
कृष्ण अविनाश
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