कोहिमा, 16 जुलाई नगालैंड की विधायिका के सदस्यों ने शनिवार को केंद्र से आह्वान किया कि वह दशकों पुरानी नगा राजनीतिक समस्या के यथाशीघ्र अंतिम समाधान के लिए एनएससीएन-आईएम को वार्ता के लिए आमंत्रित कर अलग ध्वज और संविधान जैसे विवादित मुद्दों को सुलझाए।
नगा राजनीति मुद्दे पर गठित संसदीय समिति ने अपील की कि वार्ता में शामिल पक्षकार इन मुद्दों को सुलझाने और ‘‘आपसी सहमति’’पर पहुंचने के लिए केंद्र और एनएससीएन-आईम के बीच वर्ष 2015 में हुए ढांचागत समझौते का संदर्भ ले। इस समिति में राज्य के सभी 60 विधायक और दो सांसद शामिल हैं।
समिति में अंगीकार किए गए प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘आधिकारिक रूप से वार्ता 31 अक्टूबर 2019 को संपन्न हो गई। प्रधानमंत्री और केंद्र गृह मंत्री से आह्वान किया जाता है कि यथाशीघ्र निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए एनएससीएन-आईएम के नेताओं को आमंत्रित किया जाए।’’
केंद्र सरकार और नेशलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) के बीच ढांचागत समझौता 80 दौर की वार्ता के बाद हुआ था। दशकों के उग्रवाद के बाद एनएससीएन-आईम ने 1997 में संघर्ष विराम की घोषणा की थी जिसके बाद केंद्र से वार्ता शुरू हुई। नगा समस्या वर्ष 1947 में आजादी मिलने के बाद ही शुरू हो गई थी।
हालांकि, इस समस्या का अंतिम समाधान अबतक नहीं निकला है।
बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नेइबा क्रोनू ने कहा, ‘‘अंतिम समाधान में देरी हो रही है क्योंकि एनएससीएन-आईएम नगा लोगों के लिए लगातार अलग झंडे और संविधान की मांग कर रहा है।’’इस बैठक में मुख्यमंत्री नेफियो रियो ने भी हिस्सा लिया।
संसदीय समिति ने वार्ता में शामिल पक्षों से ऐसा अंतिम समाधान निकालने का आह्वान किया जो ‘‘सम्मानजनक, स्वीकार्य और समावेशी हो।’’
इस समिति का गठन विपक्ष विहीन संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा केंद्र और नगा वार्ता समूहों पर दशकों पुरानी नगा समस्या का अंतिम समाधान निकालने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से जून 2021 में किया गया था।
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