नयी दिल्ली, 25 जुलाई पुणे के मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशन्स ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) से रणनीतिक वित्तपोषण की मदद से कोविड-19 जांच किट के विकास एवं उत्पादन को बढ़ा दिया है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई।
वर्तमान में, मायलैब 2,00,000 आरटी-पीसीआर और 50,000 आरएनए जांच किट बना रही है।
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कंपनी ने हाल ही में एक आणविक प्रयोगशाला मशीन, कॉम्पैक्ट एक्सेल, लॉन्च की है जो एकल मशीन इकाई में विभिन्न प्रतिक्रियाशील द्रव्यों के उत्पादन के साथ ही कई आणविक जांच कर सकती है।
यह मशीन ग्रामीण भारत में आणविक नैदानिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने में मदद करेगी क्योंकि इसमें अवसंरचना पर आने वाला बड़ा खर्च, पूंजी और परिचालन खर्च को कम करता है क्योंकि कुछ ही कर्मचारी बड़ी संख्या में जांच कर सकते हैं।
बायोटेक्नोलॉजी विभाग- बायोटेक्नोलॉजी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत आर्थिक मदद दी जा रही है।
मायलैब डिस्कवरी सोल्यूशन्स के प्रबंध निदेशक, हसमुख रावल ने कहा, “हम बीआईआरएसी के बहुत शुक्रगुजार हैं जिसने हमारी तब मदद की जब कोई हमपर भरोसा नहीं कर रहा था। इस निधि के साथ हम सचमुच उत्पादन की प्रक्रिया को गति दे पाएंगे।”
डीबीटी की सचिव एवं बीआईआरएसी की प्रमुख, डॉ रेणु स्वरूप ने कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के खिलाफ देश की जंग में, देश भर में जांच क्षमता बढ़ाने के लिए गुणवत्ता से भरी आरटी-पीसीआर जांच किट की स्वदेशी आपूर्ति को अहम जरूरत के रूप में पहचाना गया है।
उन्होंने कहा, “इसलिए, मायलैब के पेथोडिटेक्ट उत्पादन को बढ़ाना एक ऐसा कदम है जो डीबीटी ने इस दिशा में बहुत पहले उठाया था। मायलैब में यह उत्पादन श्रृंखला त्वरित, उच्च प्रवाह क्षमता के जांच मंच का निर्माण करता है और आत्मनिर्भर भारत के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है।”
एक अन्य बयान में डीबीटी ने कहा कि वह कोविड-19 के कारण सामने आन वाली स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए जांच, दवाओं और टीकों के विकास पर सक्रियता से काम कर रहा है।
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