नयी दिल्ली, 14 अगस्त दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन कीमतों में सुधार देखने को मिला, जबकि बिनौला तथा सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें पूर्वस्तर पर ही बंद हुईं।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक कम है और यह पिछले कारोबारी सत्र के पांच लाख बोरी से घटकर करीब साढ़े चार लाख बोरी रह गई। सरसों की थोड़ी मांग भी निकली है जिससे सरसों तेल-तिलहन के भाव मजबूती दर्शाते बंद हुए। दूसरी ओर किसानों द्वारा नीचे भाव पर बिकवाली नहीं करने से सोयाबीन तिलहन के भाव में भी मजबूती रही।
उन्होंने बताया कि सोयाबीन तेल कीमतों की साधारण गिरावट सामान्य है। मलेशिया में अधिक घटबढ़ नहीं होने तथा रुपये में रिकॉर्ड गिरावट की वजह से आयात महंगा बैठने के बीच सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। मूंगफली की उपज की कमी होने के बीच इसके तेल- तिलहन भी पूर्वस्तर पर रहे।
सूत्रों ने कहा कि गणेश चतुर्थी के समय ‘सॉफ्ट आयल’ (नरम तेल) विशेषकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में सूरजमुखी तेल की मांग बढ़ती है। आगामी त्योहारों के समय सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, बिनौला, मूंगफली जैसे नरम तेलों की मांग बढ़ेगी और पाम एवं पामोलीन के आयात बढ़ने से देश में कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि अधिकतर आम उपभोक्ता इसे घर के लिए नहीं खरीदते और पाम-पामोलीन नरम तेलों की जगह नहीं ले सकते। इस परिस्थिति के मद्देनजर सरकार को इस बात पर नजर रखनी होगी और तेल संगठनों को सरकार को बताना चाहिये कि जुलाई-अगस्त में विदेशों से सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की जहाजों पर लदान के आंकड़े क्या
हैं?
सूत्रों ने कहा कि नीचा भाव होने के कारण पिछले साल के मुकाबले सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की मांग में लगभग 10-15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये दोनों ही मौजूदा समय में मूंगफली और बिनौला तेल की कमी को पूरा कर रहे हैं।
तेल संगठनों को इस बात को भी उजागर करना चाहिये कि बंदरगाहों पर आयातित तेल को लागत से कम दाम पर बेचने की कौन सी मजबूरी आ रही है। बैंकों का कर्ज डूबे इससे बचने के लिए वे माल को रोक भी सकते हैं और उन्हें कम से कम लागत के भाव से इसे बेचना चाहिये। इससे आयात भी प्रभावित नहीं होगा। सूरजमुखी तेल आयात भाव के मुकाबले 5-6 रुपये किलो नीचे भाव पर बेचा जा रहा था यानी इसके आयात में 5-6 रुपये किलो का नुकसान हो रहा है। पिछले एक-डेढ़ महीने से सोयाबीन में ऐसा ही नुकसान अब कुछ ठीक हुआ है और अब यह 1-1.5 रुपये किलो का रह गया है। इन्हीं वजहों से नरम तेलों का आयात घटने का आशंका बनी है। इसलिए सरकार को विदेशों से नरम तेलों के लदान के बारे में जानकारियां देनी चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के कारण आम उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों के सस्तेपन का लाभ ही ना मिल रहा हो तो ऐसे सस्ते आयात का क्या फायदा है। उल्टा इस सस्ते आयात से देश के तिलहन किसान और तेल उद्योग संकट की स्थिति में हैं। तेल संगठनों को इस चिंता से सरकार को अवगत कराना चाहिये।
शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,610-5,660 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,865-7,915 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,735-3,020 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,520 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,750 -1,845 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,750 -1,860 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,025 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,065-5,160 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,830-4,925 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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