जरुरी जानकारी | सरसों में गिरावट, सीपीओ में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार का मिला-जुला रुख रहा। एक ओर, सस्ते आयातित तेलों की भरमार के कारण जहां सरसों तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट देखी गई, वहीं मूंगफली और सोयाबीन तेल-तिलहन, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं। बेकरी वालों की मांग के कारण कच्चा पामतेल (सीपीओ) कीमत में सुधार हुआ।
नयी दिल्ली, 12 अगस्त दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार का मिला-जुला रुख रहा। एक ओर, सस्ते आयातित तेलों की भरमार के कारण जहां सरसों तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट देखी गई, वहीं मूंगफली और सोयाबीन तेल-तिलहन, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं। बेकरी वालों की मांग के कारण कच्चा पामतेल (सीपीओ) कीमत में सुधार हुआ।
बाजार सूत्रों ने कहा कि आने वाले त्यौहारों के मौसम में नरम तेलों की मांग बढ़ने की स्थिति को देखते हुए सरकार को यह ध्यान में रखना होगा कि कितनी मात्रा में अर्जेन्टीना और अन्य देशों में जुलाई महीने में नरम तेल की जहाजों पर लदान हुई है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल कम हानि की वजह से बैंकों में ऋणसाख पत्र (लेटर आफ क्रेडिट या एलसी) घुमाने वाले आयातक सोयाबीन और सूरजमुखी में अधिक नुकसान को देखते हुए काफी कम नुकसान वाले सीपीओ और पामोलीन का आयात बढ़ा रहे हैं, जो माल बंदरगाहों पर है।
सीपीओ और पामोलीन की ज्यादातर औद्योगिक मांग और कम आयवर्ग के लोगों में मांग होती है, लेकिन आम उपभोक्ता नरम तेल खाना पसंद करते हैं। ऐसे में खाद्यतेलों के आयात का संतुलन थोड़ा बिगड़ा है और सरकार को देखना होगा कि पिछले महीने और इस महीने विदेशों में सोयाबीन तेल की कितनी लदान हुई है ताकि त्यौहारों के समय नरम तेलों की कमी ना होने पाये।
अर्जेन्टीना और ब्राजील से देश के बंदरगाह पर इन खाद्यतेलों के आने और बाद में जहाज को खाली करने में 35-45 दिन का समय लगता है।
सूत्रों ने कहा कि देश का तेल उद्योग और तिलहन किसान बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं और इसे संभालना कठिन काम हो जायेगा। सरकार अगर खाद्यतेल सस्ता ही बिकवाना चाहती है तो उसे केवल थोक बिक्री दाम में गिरावट के बजाय जमीनी हकीकत पर नजर भी रखनी होगी कि थोक बिक्री दाम में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को मिल भी रहा है अथवा नहीं। बड़ी कंपनियों और पैकरों के अधिक एमआरपी होने के कारण उपभोक्ताओं को तेल ऊंचे दाम में खरीदना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सूरजमुखी तेल का आयात करने में दाम 89 रुपये लीटर पड़ता है, लेकिन मांग नहीं होने के कारण रिफाइंड करने वाली कंपनियां इसे 83 रुपये लीटर के थोकभाव से बेच रही हैं। इसका अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 105-108 रुपये होना चाहिये लेकिन उपभोक्ताओं को यह तेल 135-145 रुपये लीटर के दाम पर मिल रहा है।
देश की एक बड़ी खाद्यतेल कंपनी ने आज 500 टन सीपीओ की खरीद की है, जिससे सीपीओ के भाव में सुधार आया। इसकी बेकरी बनाने वाली कंपनियों में मांग है।
शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,600-5,650 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,865-7,915 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,735-3,020 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,745 -1,840 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,745 -1,855 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,220 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,020 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,025 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,050-5,145 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,815-4,910 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 12, 2023 08:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

