देश की खबरें | मुस्लिम छात्र ने न्यायालय से जगन्नाथ यात्रा पर रोक के आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ओडिशा के नयागढ़ जिले के 19 वर्षीय मुस्लिम छात्रा आफताब हुसैन ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर जगन्नाथ यात्रा पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है।
भुवनेश्वर, 21 जून ओडिशा के नयागढ़ जिले के 19 वर्षीय मुस्लिम छात्रा आफताब हुसैन ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर जगन्नाथ यात्रा पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है।
न्यायालय ने 18 जून को कहा था कि जन स्वास्थ्य और नागरिकों के हितों की रक्षा के मद्देनजर इस साल 23 जून को ओडिशा के पुरी में निर्धारित यात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती और ''अगर हमने इसकी अनुमति दी तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे।''
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इस यात्रा में दुनियाभर से लाखों लोग शिरकत करते हैं।
रथयात्रा को लेकर अदालत का रुख करने वाले हुसैन नयागढ़ ऑटोनॉमस कॉलेज में बीए अर्थशास्त्र के तृतीय वर्ष के छात्र हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर राज्य का दूसरा सलाबेग कहा जा रहा है।
सलाबेग मुस्लिम व्यक्ति और भगवान जगन्नाथ के बड़े भक्त थे। मुख्य तीर्थ से गुंडिचा मंदिर तक की तीन किलोमीटर की यात्रा के दौरान सम्मान के रूप में ग्रैंड रोड पर स्थित सलाबेग की कब्र के पास स्वामी का रथ कुछ देर के लिए रुकता है।
मुगल सूबेदार के पुत्र सलाबेग ओडिशा के भक्ति कवियों के बीच विशेष स्थान रखते हैं क्योंकि उन्होंने अपना जीवन भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर दिया था। वह 17वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुए थे।
हुसैन ने कहा कि वह बचपन से ही भगवान जगन्नाथ से प्रभावित रहे हैं और उनके दिवंगत दादा मुलताब खान भी उनके भक्त थे।
छात्र ने अपने अधिवक्ता पी के महापात्रा के जरिये उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।
हुसैन ने कहा कि उनके दादा ने 1960 में इतामती में त्रिनाथ (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) मंदिर का निर्माण किया था।
छात्र ने कहा कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ पर कई पुस्तकें पढ़ी हैं और वह 'ब्रह्माण्ड के भगवान' के प्रति आस्था रखते हैं। हुसैन के पिता इमदाद हुसैन, मां राशिदा बेगम और छोटे भाई अनमोल ने उन्हे जगन्नाथ की मूर्ति की पूजा करने से कभी नहीं रोका।
हालांकि हुसैन ने पुरी में 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर के दर्शन कभी नहीं किये क्योंकि वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुए हैं। मंदिर में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति है।
उन्होंने कहा, ''मैंने कभी मंदिर के दर्शन नहीं किये क्योंकि मुझे इसकी अनुमति नहीं है। एक इंसान होने के नाते मेरा मानना है कि ब्रह्माण्ड का रचनाकार एक ही है।''
हुसैन समेत 21 लोगों और संगठनों ने यात्रा पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिये उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल की है, जिन पर सोमवार को सुनवाई होगी।
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