देश की खबरें | मुंडका आग: लापता व्यक्तियों के परिजनों का लंबा इंतजार

नयी दिल्ली, 14 मई राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके स्थित संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के बाहर शुक्रवार रात से बैठी सुमन (बदला हुआ नाम) अपनी बड़ी बेटी पूजा (19) के बारे में जानकारी का बेसब्री से इंतजार करते हुए बीच-बीच में फूट फूटकर रोने लगती हैं।

अधेड़ आयु की महिला के साथ उसकी छोटी बेटी पिंकी (18) भी है और पिंकी की आंखें भी सूजी हुई हैं।

पूजा उन 29 व्यक्तियों में शामिल है जिनका शुक्रवार शाम बाहरी दिल्ली के मुंडका में चार मंजिला इमारत में आग लगने के बाद अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। पूजा ने हाल ही में एक सीसीटीवी कैमरा और राउटर निर्माण एवं असेंबलिंग कंपनी के साथ काम करना शुरू किया था। उक्त कंपनी की एक इकाई इस इमारत में स्थित थी।

सुमन ने अपने आंसू पोछते हुए कहा कि पूजा अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली थी। सुमन ने कहा, ‘‘वह कहती थी कि तुम्हें काम नहीं करना है, मैं पैसे कमाऊंगी। पूजा के पिता की 2012 में मृत्यु हो गई थी। मैं एक घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी और बहुत कम पैसा कमाती थी। हालांकि, जब से उसे नौकरी मिली, वह सब कुछ संभाल रही थी।’’

अपनी मां को पूजा के बारे में बात करते हुए देखकर पिंकी भी रो पड़ी और बोली, ‘‘कहां है वो? हम यहां कल रात से बैठे हैं। मैं अधिकारियों से जानकारी मांग रही हूं लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है।’’

पिंकी ने कहा कि पूजा शुक्रवार सुबह जब काम पर निकली तो उसने सोचा भी नहीं था कि वह घर वापस नहीं आएगी।

वहीं, अपनी बहन आशा की तलाश में घटनास्थल पर पहुंचा 24 वर्षीय वीरपाल पुलिसकर्मियों को उसकी तस्वीर दिखाकर उसके बारे में जानकारी मांगता दिखा।

वीरपाल ने कहा, '' हमने कल रात से कुछ नहीं खाया है। परिवार बेहद परेशान है। कृपया कुछ कीजिये। केवल इतना बता दीजिये कि वह जीवित है या नहीं?''

पुलिस के अनुसार शुक्रवार को लगी आग में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 12 घायल हो गए। पुलिस के अनुसार मृतकों में से अब तक सात की पहचान हुई है।

इस बीच मुंडका इमारत में बचाव अभियान पूरा कर लिया गया है। दिल्ली दमकल सेवा के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि उन्होंने शनिवार सुबह कुछ और जले हुए अवशेष बरामद किए और मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह पहचानना मुश्किल है कि अवशेष एक व्यक्ति के हैं या उससे अधिक के।

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