नयी दिल्ली, 11 दिसंबर वर्ष 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले के दोषियों में से एक ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुख्य सूचना आयुक्त के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसे मामले में महाराष्ट्र सरकार की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था।
याचिका दायर करने वाले एहतशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीक को मामले में मृत्युदंड सुनाया गया है।
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उसने इस मामले में इंडियन मुजाहिदीन की संलिप्तता से संबंधित जांच पर आंध्र प्रदेश सरकार का डोजियर भी उपलब्ध कराए जाने की मांग की थी।
मुंबई में 11 जुलाई 2006 को पश्चिमी लाइन की कई लोकल ट्रेनों में भीषण आरडीएक्स विस्फोट हुए थे जिनमें 189 लोग मारे गए थे और 829 अन्य घायल हुए थे।
सिद्दीक ने दावा किया है कि मामले में उसे गलत फंसाया गया और यह उसके मानवाधिकार उल्लंघन के बराबर है।
उसके वकील ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नवीन चावला के समक्ष दलील दी कि 2019 में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में सूचना के अधिकार के तहत कुछ सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है।
अदालत ने दोषी की ओर से पेश वकील अर्पित भार्गव से कहा कि वह 2019 का आदेश प्रस्तुत करें।
इसके बाद अदालत ने मामले को 13 जनवरी 2021 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
गृह मंत्रालय की ओर से पेश हुए केंद्र सरकार के वकीलों राहुल शर्मा और सी के भट्ट ने दोषी की याचिका का विरोध किया और कहा कि जो सूचना मांगी गई है, वह उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
उन्होंने दलील दी कि दोषी विगत में भी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई बार इस तरह के आग्रह कर चुका है।
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