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एमएसएमई निर्यातकों पर सबसे अधिक पड़ेगी कोविड-19 की मार: विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि एमएसएमई निर्यातकों पर इसके प्रभाव का आकलन विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बयान से लगाया जा सकता है। डब्ल्यूटीओ ने कहा है कि दुनियाभर के सभी देश इस महामारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में 2020 में वस्तुओं का वैश्विक व्यापार 13 से 32 प्रतिशत तक घट सकता है।

एमएसएमई निर्यातकों पर सबसे अधिक पड़ेगी कोविड-19 की मार: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल कोविड-19 महामारी की वजह से लागू बंदी से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) क्षेत्र के निर्यातक सबसे अधिक प्रभावित होंगे। व्यापार क्षेत्र के विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। देश के कुल निर्यात में एमएसएमई क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एमएसएमई निर्यातकों पर इसके प्रभाव का आकलन विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बयान से लगाया जा सकता है। डब्ल्यूटीओ ने कहा है कि दुनियाभर के सभी देश इस महामारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में 2020 में वस्तुओं का वैश्विक व्यापार 13 से 32 प्रतिशत तक घट सकता है।

एमएसएमई क्षेत्र का सेवा गतिविधियों से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सा करीब 25 प्रतिशत है। जबकि विनिर्माण उत्पादन की दृष्टि से जीडीपी में इसका हिस्सा 33 प्रतिशत से ज्यादा है।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर का कहना है कि सरकार को निर्यातकों के लिए जल्द प्रोसाहन पैकेज लाना चाहिए। मौजूदा संकट से एमएसएमई क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि भारत पर इसका काफी बुरा असर होगा। एमएसएमई निर्यातक इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा उन्हें अपने श्रमिकों को भी वापस बुलाने में परेशानी होगी, जो कोरोना वायरस फैलने के बीच अपने गांवों को लौट गए हैं।

धर ने कहा कि अमेरिका, जापान और जर्मनी सहित कई देशों ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है लेकिन भारत ने अभी तक निर्यातकों के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) में प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं ठहर गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के प्रमुख बाजारों में मांग घटने की वजह से भारत का पेट्रोरसायन, रत्न एवं आभूषण, वाहन और वाहन कलपुर्ज, सूती धागे और कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पादों तथा मांस निर्यात को झटका लगेगा।’’

आंकड़ों के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा कि इसका आकलन करना कठिन है। यह बहुत हद तक सरकार की पहल की तुलना में वायरस पर निर्भर करेगा। वायरस से हुए नुकसान में कितना समय लगेगा-तीन महीने, महीने, एक साल या उससे ज्यादा।

हालांकि, इसके साथ ही जोशी ने कहा कि इस महामारी ने कई क्षेत्र मसलन फार्मास्युटिकल्स में अवसर भी उपलब्ध कराए हैं। भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। यूरोपीय और अमेरिका के बाजारों में यह काफी प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है। जोशी ने कहा कि कोरोना वायरस चीन से फैला है। ऐसे में बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन के बाहर निवेश के वैकल्पिक गंतव्यों की तलाश में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत इस आपदा को अपने लिए एक बड़े अवसर में बदल सकता है। भारत को एक विनिर्माण हब बनाया जा सकता है और ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाया जा सकता है।’’

सहायक प्रोफेसर और कृषि अर्थशास्त्र विशेषज्ञ चिराला शंकर राव ने कहा कि इस समय कृषि उत्पाद में लगे एमएसएमई निर्यातकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कोरोना वायरस की वजह से वैश्विक बाजारों में खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ी है।

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (टीपीसीआई) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि दुनिया में चावल, गेहूं और दलहन जैसे आवश्यक जिंसों की मांग 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2020 04:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).