देश की खबरें | मप्र विधानसभा चुनाव : भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, हारी हुई सीटों पर जोर

भोपाल, 17 अगस्त मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन सीटों पर अपना ध्यान केन्द्रीत किया है जिनपर उसे 2018 और 2013 के चुनावों में हार मिली थी।

भाजपा ने 39 उम्मीदवारों की पहली सूची में 14 ऐसे लोगों को फिर से मौका दिया है जो पिछली बार चुनाव नहीं जीत सके थे। इनमें तीन पूर्व मंत्री भी शामिल हैं।

रणनीति में बदलाव के तहत मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा ने विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले ही पांच महिलाओं सहित 39 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है और इस प्रकार वह चुनावी तैयारियों और प्रत्याशियों को तय करने के मामले में वह अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से आगे निकल गई है।

मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में 230 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं।

पिछले सप्ताह मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सात उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची सबसे पहले बसपा में ही जारी की थी। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के बीच द्विध्रुवीय मानी जाती है, जबकि बसपा और सपा सहित अन्य दल प्रदेश में सीमांत खिलाड़ी के तौर पर देखे जाते हैं।

जिन 39 सीटों के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है उनमें से लगभग सभी सीट पर नवंबर 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार मिली थी।

कांग्रेस ने 2018 दिसंबर में अपनी सरकार बनाई थी, लेकिन मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विधायकों के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने से वह सत्ता से बाहर हो गई थी।

भाजपा ने जिन 39 सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किये हैं उनमें से 38 सीट पर वर्तमान में कांग्रेस तथा एक सीट पर (पथरिया से बसपा विधायक रामबाई) बसपा का कब्जा है। इन 39 विधानसभा सीटों में से भाजपा 2013 में भी कुछ सीटें जीतने में असफल रही थी।

पार्टी के एक नेता ने कहा कि 14 उम्मीदवार 50 वर्ष से कम उम्र के हैं, जबकि सूची में 12 नए चेहरे हैं, जिनमें आलोक शर्मा (उत्तरी भोपाल) भी शामिल हैं।

मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादार अदल सिंह कंसाना को मुरैना जिले के सुमावली से मैदान में उतारा गया है। वह नवंबर 2020 में सुमावली से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए हार गए थे।

सूत्रों के अनुसार, उनके नामांकन से निश्चित रूप से सिंधिया के वफादारों का मनोबल बढ़ेगा, जिनमें से कुछ पाला बदलने के बाद खुद को दरकिनार महसूस कर रहे थे।

हालांकि, एक अन्य सिंधिया वफादार, रणवीर जाटव सूची में जगह नहीं बना सके। जाटव ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में 2018 में भिंड जिले के गोहद से राज्य भाजपा अनुसूचित जाति सेल के अध्यक्ष लालसिंह आर्य को 23,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।

रणवीर ने सिंधिया खेमे के अन्य कांग्रेस विधायकों की तरह मार्च 2020 में इस्तीफा दे दिया और उसी साल नवंबर में भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा लेकिन गोहद सीट कांग्रेस के मेवाराम जाटव से हार गए।

सूची पर एक सरसरी नजर, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कई सीट शामिल हैं, डालने से पता चलता है कि भाजपा ने 14 ऐसे उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है, जो पांच साल पहले चुनाव हार गए थे इनमें राज्य के तीन पूर्व मंत्री - लालसिंह आर्य, ललिता यादव और ओमप्रकाश धुर्वे शामिल हैं।

बृहस्पतिवार सुबह आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा देने वाले राजकुमार कराहे को शाम को नयी दिल्ली में घोषित सूची में अपना नाम मिला। भाजपा ने उन्हें बालाघाट जिले के लांजी से मैदान में उतारा है। लांजी से विधानसभा की पूर्व उपाध्यक्ष हिना कावरे कांग्रेस की वर्तमान विधायक हैं।

भाजपा महासचिव अरुण सिंह द्वारा हस्ताक्षरित सूची के अनुसार, ध्रुव नारायण सिंह और आलोक शर्मा क्रमशः मध्य भोपाल और उत्तरी भोपाल से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पूर्व मंत्री आर्य और प्रीतम लोधी क्रमश: गोहद (एससी), जिला भिंड और पिछोर, जिला शिवपुरी से चुनाव मैदान में होंगे।

भाजपा ने सरला विजेंद्र रावत (सबलगढ़), अदल सिंह कंसाना (सुमावली), प्रियंका मीना (चाचौड़ा), जगन्नाथ सिंह रघुवंशी (चंदेरी), वीरेंद्र सिंह लंबरदार (बंडा), कामाख्या प्रताप सिंह (महाराजपुर), ललिता यादव (छतरपुर), लाखन पटेल (पथरिया), राजेश कुमार वर्मा (गुन्नौर-एससी), सुरेंद्र सिंह गहरवार (चित्रकूट), हीरसिंह श्याम (पुष्पराजगढ़-एसटी), धीरेंद्र सिंह (बड़वारा-एसटी), नीरज ठाकुर (बरगी) और अंचल सोनकर (जबलपुर पूर्व) से टिकट दिया है।

पार्टी ने ओमप्रकाश धुर्वे (शाहपुरा-एसटी), डॉ. विजय आनंद मरावई (बिछिया-एसटी), भगत सिंह नेताम (बैहर-एसटी), कमल मर्सकोले (बरघाट-एसटी), महेंद्र नागेश (गोटेगांव-एससी), नानाभाऊ मोहोड़ (सौंसर), प्रकाश उइके (पांढुर्ना-एसटी) और चन्द्रशेखर देशमुख (मुलताई) को उम्मीदवार बनाया है।

साथ ही महेंद्र सिंह चौहान (भैंसदेही-एसटी), राजेश सोनकर (सोनकच्छ-एससी), राजकुमार मेव (महेश्वर-एससी), आत्माराम पटेल (कसरावद), नागर सिंह चौहान (अलीराजपुर-एसटी), भानु भूरिया (झाबुआ एसटी), निर्मला भूरिया (पेटलावद-एसटी), जयदीप पटेल (कुक्षी एसटी), कालू सिंह ठाकुर (धरमपुरी-एसटी), मधु वर्मा (राऊ), ताराचंद गोयल (तराना-एससी) और सतीश मालवीय (घटिया-एससी) को भी भाजपा ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकित किया है।

भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के अनुज वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण सिंह की सीट चाचौड़ा से प्रियंका मीणा, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एनपी प्रजापति की सीट गोटेगांव से महेंद्र नागेश, विधानसभा की पूर्व उपाध्यक्ष हिना कावरे की सीट लांजी से राजकुमार कर्राये, पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे की सीट मुलताई से चंद्रशेखर देशमुख, पूर्व मंत्री आरिफ अकील की सीट भोपाल उत्तर से भोपाल के पूर्व महापौर आलोक शर्मा, कांग्रेस के चर्चित विधायक आरिफ मसूद की सीट भोपाल मध्य से ध्रुवनारायण सिंह को भाजपा ने अपनी पहली सूची में उम्मीदवार बनाया है।

इसी प्रकार पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की सीट सोनकच्छ से भाजपा ने इंदौर जिले के सांवेर से पूर्व विधायक राजेश सोनकर, पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ की सीट महेश्वर, जिला खरगोन से राजकुमार मेव, कांग्रेस के दिवंगत नेता सुभाष यादव के पुत्र एवं पूर्व मंत्री सचिन यादव की सीट कसरावद जिला खरगोन से आत्माराम पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश के प्रमुख आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया की सीट झाबुआ से भानु भूरिया, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल की सीट कुक्षी जिला धार से जयदीप पटेल, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी की सीट राऊ जिला इंदौर से मधु वर्मा, तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह की सीट पिछोर जिला शिवपुरी से प्रीतम लोधी को भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

बसपा विधायक रामबाई की सीट पथरिया जिला दमोह से भाजपा ने लखन पटेल को उम्मीदवार घोषित किया है। 2018 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा 109 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी।

कांग्रेस, जो सामान्य बहुमत से दो सीट पीछे थी, ने निर्दलीय, बसपा और सपा के विधायकों के समर्थन से पार्टी के दिग्गज नेता कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाई।

हालांकि, नाथ सरकार 15 महीने बाद गिर गई जब कांग्रेस विधायकों का एक वर्ग, जिनमें से अधिकांश सिंधिया के प्रति वफादार थे, छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए। मार्च 2020 में भगवा पार्टी सत्ता में लौट आई और शिवराज सिंह चौहान नए कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने।

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