नयी दिल्ली, दो जून विदेशी बाजारों में सुधार के रुख के बीच शुक्रवार को दिल्ली बाजार में ज्यादातर तेल तिलहनों के भाव में तेजी रही। दूसरी ओर मूंगफली तेल तिलहन पूर्वस्तर पर बने रहे।
मलेशिया एक्सचेंज और शिकागो एक्सचेंज में मजबूती रही।
सूत्रों ने कहा कि सरकार ने तेल के दाम से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिये कुछ कदम उठाये हैं, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है।
खाद्य तेल कीमतों की तेजी से प्रदेश की जनता को राहत प्रदान करने के मकसद से हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने 19 लाख 24 हजार राशनकार्ड धारकों के लिए 147 रुपये लीटर बिकने वाले सरसों तेल, उपभोक्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये एक जुलाई से 110 रुपये लीटर उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
दूसरी ओर खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा की अध्यक्षता में तेल उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ जो आज बैठक हुई। उसमें तेल उद्योग और खाद्यतेल संगठनों के प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे वैश्विक खाद्यतेल कीमतों में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को पारित करने के लिए खाद्यतेल के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 8-12 रुपये लीटर की तत्काल कमी करें।
सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में तेल संगठनों को सरकार के सामने यह तथ्य सामने लाना चाहिये था कि मई 2022 में सूरजमुखी तेल का बंदरगाह पर थोक दाम 2,500 डॉलर था जो दिसंबर 2022 में घटकर 1,400 डॉलर प्रति टन रह गया। दिसंबर 2022 से अब तक यही दाम घटकर 870 डॉलर रह गया है। यानी मई 2022 से मई 2023 के बीच सूरजमुखी के दाम में कुल 1,630 डॉलर प्रति टन की कमी आई है। इस स्थिति में अधिक लागत वाली देशी तिलहन फसलें कैसे बाजार में खपेंगी ?
सूत्रों ने कहा कि सरकार को उपभोक्ताओं को सस्ता खाद्यतेल उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए यह भी देखना होगा कि देश के तिलहन किसानों को उनके किस जुर्म की सजा मिल रही है। एक तो वो लगातार तिलहन उत्पादन बढ़ाकर अपने दायित्वों को निर्वहन कर रहे हैं पर उसके लिए बाजार बनाना तो सरकार का काम है। अब उत्पादन बढ़ने के बाद उनकी फसल नहीं खपे तो तिलहन किसान क्या करेंगे?
वैसे भी खाद्यतेलों की महंगाई वैश्विक बाजार के कारण नहीं है और एमआरपी के नियमों को कठोर बनाकर, एमआरपी की जानकारी सरकारी वेब पोर्टल पर अनिवार्य रूप से खुलासा करने के जरिये इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता हैं। लेकिन एमआरपी में मामूली कटौती से अपेक्षित परिणाम निकलने की संभावना कम है। मौजूदा समय में 30 जून तक के शुल्कमुक्त आयात वाले सूरजमुखी तेल का थोक दाम बंदरगाह पर 66 रुपये लीटर बैठता है, इससे तो देशी तेल तिलहन उद्योग और किसान बर्बाद हो जायेंगे।
सूत्रों ने कहा कि आज की तारीख में सूरजमुखी, सोयाबीन, चावल भूसी तेल (राइस ब्रान) का दाम किसी भी सूरत में 100-108 रुपये लीटर से अधिक नहीं होना चाहिये जो अधिक एमआरपी के कारण खुदरा में काफी ऊंचे दाम पर बिक रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात पर गौर करना होगा कि जब सूरजमुखी का भाव घटकर लगभग 1,200 डॉलर प्रति टन रह गया था तो उस वक्त आयात शुल्क 38.5 प्रतिशत क्यों लगा रखी थी और अब जब इस तेल का दाम 870 डॉलर रह गया है तो उस पर सामान्य स्थिति में 5.5 प्रतिशत शुल्क लागू और इसके अलावा 30 जून तक शुल्कमुक्त आयात की छूट क्यों दी गई है ? इससे तो देश में खाद्यतेलों का जबर्दस्त और अनियंत्रित आयात ही बढ़ेगा।
सूत्रों ने आशंका जताई कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की देश के तेल तिलहन उद्योग को नष्ट कर देश को पूरी तरह आयात पर निर्भर बनाने की मंशा हो सकती है और इस पहलू पर गहराई से नजर रखने की जरुरत है।
उन्होंने कहा कि देशी तेल मिलों के परिचालन में कमी आने की वजह से आज एमसीडीईएक्स के वायदा कारोबार में बिनौला खली के जुलाई अनुबंध की कीमत में 2.9 प्रतिशत और सरसों खल के दाम में एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देशी तेल मिलें नही चलीं तो आगे जाकर तेल खली के दाम में और वृद्धि देखने को मिल सकती है और दूध के दाम और महंगे हो सकते हैं।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 4,780-4,880 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,200-6,260 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,335-2,600 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,565-1,645 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,565-1,675 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 7,850 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,055-5,130 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,830-4,905 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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