नयी दिल्ली, 30 अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश की सुरक्षा में सशस्त्र बलों के श्वान दस्ते के योगदान की जमकर सराहना की और लोगों से आग्रह किया कि यदि कुत्ते को पालने की उनकी योजना है तो वे भारतीय नस्ल का कुत्ता पालें।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री भारतीय सेना के कुत्तों सोफी एवं विदा की चर्चा जिन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ‘कमेंडेशन कार्ड‘ से सम्मानित किया गया है।
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उन्होंने कहा, ‘‘सशस्त्र बलों और सुरक्षा बलों के पास ऐसे बहुत सारे बहादुर कुत्ते हैं जिन्होंने अनगिनत बार बम विस्फोटों और आतंकी साजिशों को विफल करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’’
मोदी ने ऐसे कुत्तों द्वारा गोला बारूद और आईईडी को सूंघ कर पता लगाये जाने के कई अन्य उदाहरण दिए और बीड पुलिस का भी उल्लेख किया जिसने हाल ही में अपने श्वान साथी रॉकी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
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रॉकी ने 300 से अधिक मामलों को सुलझाने में पुलिस की मदद की थी।
कुत्तों की भारतीय नस्लों पर चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें पालने में कम खर्च आता है और उन्हें भारतीय वातावरण तथा परिवेश के अनुरूप बेहतर तरीके से ढाला जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय नस्ल के कुत्ते भी बहुत अच्छे होते हैं और बहुत सक्षम होते हैं। इनमें मुधोल हाउंड हैं, हिमाचली हाउंड है, ये बहुत ही अच्छी नस्लें हैं। राजापलायम, कन्नी, चिप्पीपराई और कोम्बाई भी बहुत शानदार भारतीय नस्ले हैं। इनको पालने में खर्च भी काफी कम आता है और ये भारतीय माहौल में ढ़ले भी होते हैं।’’
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेन्सियां भी अपने सुरक्षा दस्ता के एक हिस्से के रूप में भारतीय नस्ल के इन कुत्तों को शामिल कर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ समय में आर्मी, सीआईएसएफ, एनएसजी ने मुधोल हाउंड कुत्तों को प्रशिक्षित करके डॉग् स्क्वॉड में शामिल किया है। सीआरपीएफ ने कोम्बाई कुत्तों को शामिल किया है।’’
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा भारतीय नस्ल के कुत्तों पर अनुसंधान भी किया जा रहा है जिससे कि उन्हें बेहतर और अधिक लाभदायक बनाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘अगली बार जब भी आप कुत्ते पालने की सोचें, आप जरुर इनमें से ही किसी भारतीय नस्ल को को घर लाएं। आत्मनिर्भर भारत, जब जन-मन का मन्त्र बन ही रहा है, तो कोई भी क्षेत्र इससे पीछे कैसे छूट सकता है।’’
ब्रजेन्द्र
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