देश की खबरें | कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की बहाली के लिए मोदी सरकार हरसंभव काम कर रही: शाह
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हरसंभव काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र शासित प्रदेश में पहली बार हुए जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव इसकी गवाही देते हैं।

शाह ने सिलसिलेवार ट्वीट कर बड़ी संख्या में मतदान के लिए जम्मू एवं कश्मीर की जनता को बधाई दी और सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बलों के प्रयासों की जमकर सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार जमीनी स्तर पर लोकतंत्र बहाल करने के लिए हरसंभव काम कर रही है। जम्मू एवं कश्मीर के इतिहास में पहली बार हुए डीडीसी के चुनाव इसकी गवाही देते हैं। बड़ी संख्या में लोगों की चुनावों में भागीदारी लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था को दर्शाती है।’’

बड़ी संख्या में मतदान में भागीदारी के लिए केंद्र शासित की जनता और सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन को बधाई देते हुए शाह ने कहा कि इससे लोकतंत्र के प्रति जम्मू एवं कश्मीर की जनता के विश्वास और हौसले को और बुलंद करेगी।

डीडीसी की 280 सीटों के लिए आठ चरण में चुनाव कराए गए थे। केंद्र शासित प्रदेश के 20 जिलों में प्रत्येक में 14 सीटें हैं। पहले चरण का मतदान 28 नवम्बर को हुआ था और आठवें एवं अंतिम चरण का मतदान 19 दिसंबर को हुआ। कुल मिलाकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इन चुनावों में 57 लाख पात्र मतदाताओं में से 51 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में यह पहला चुनाव था। नतीजों के मुताबिक भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसे 74 सीटें मिली हैं जबकि नेशनल कांफ्रेंस को 67, पीडीपी को 27 और कांग्रेस को 26 सीटें मिली हैं।

कश्मीर केन्द्रित मुख्य धारा की सात राजनीतिक पार्टियों ने गुपकर घोषणा पत्र गठबंधन (पीएजीडी) के बैनर तले चुनाव लड़ा था। इन पार्टियों में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी भी शामिल हैं। गुपकर गठबंधन के खाते में 110 सीटें गई हैं।

गुपकर गठबंधन ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और उसे राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील करने के केंद्र सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध किया था।

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