जरुरी जानकारी | अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में मिला-जुला रुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में मिले-जुले रुख के बीच बृहस्पतिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सरसों, मूंगफली तेल तिलहन, बिनौला तेल सहित अधिकांश तेल-तिलहनों कीमतों में गिरावट आई। दूसरी ओर सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल की कीमतें पूर्व-स्तर पर बंद हुईं।
नयी दिल्ली, आठ जून विदेशी बाजारों में मिले-जुले रुख के बीच बृहस्पतिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सरसों, मूंगफली तेल तिलहन, बिनौला तेल सहित अधिकांश तेल-तिलहनों कीमतों में गिरावट आई। दूसरी ओर सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल की कीमतें पूर्व-स्तर पर बंद हुईं।
मलेशिया एक्सचेंज में 1-1.5 प्रतिशत की गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में मामूली सुधार देखा जा रहा है।
कारोबारी सूत्रों ने कहा कि सूरजमुखी तेल की खपत दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में अधिक होती है। सूरजमुखी तेल के साथ सोयाबीन तेल इतने अधिक मात्रा में आयात हो चुका है और यह इतना सस्ता है कि देशी तेल तिलहनों के लिए बाजार में खप पाना मुश्किल होगा। देशी तेल मिलें घाटे की स्थिति के कारण भारी तादाद में बंद हो चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, देशी तिलहनों की पेराई नहीं होने पर पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले तेल-खली महंगे हो जाएंगे जिसका दुग्ध व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संभवत: इसी वजह से पिछले दिनों दूध के दामों में कई बार वृद्धि करनी पड़ी है।
देश की एक प्रमुख खाद्यतेल विक्रेता कंपनी ने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कमी की घोषणा की है लेकिन सूत्रों ने इस कटौती को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि आज की परिस्थिति के हिसाब से सूरजमुखी तेल का एमआरपी अधिक से अधिक 98-110 रुपये लीटर के बीच होना चाहिये।
उन्होंने कहा कि आज की परिस्थिति में बंदरगाह पर थोक में पामोलीन तेल से सूरजमुखी तेल 4-5 रुपये लीटर और सोयाबीन तेल से 12-14 रुपये प्रति लीटर सस्ता बैठता है लेकिन खुदरा बाजार में सूरजमुखी तेल, पामोलीन तेल से 25-30 रुपये महंगा बिक रहा है। सरकार को इस पर गौर करने की जरुरत है।
सूत्रों ने कहा कि अगर सरकार को महंगाई कम करने की चिंता है तो उसे सूरजमुखी तेल 90-95 रुपये लीटर के भाव पर मिल जाएगा। इसे आयात कर सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत उपभोक्ताओं में वितरित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को तेल भी सस्ता मिलना सुनिश्चित होगा और एमआरपी कम करवाने के झंझट से मुक्ति भी मिलेगी।
सूत्रों ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि आयात शुल्क बढ़ाने से बांग्लादेश और नेपाल से रिफाइंड खाद्य तेल और वनस्पति का आयात बढ़ेगा तो उस चिंता को बंगाल और बिहार में राशन की दुकानों में इस तेल को देकर खत्म किया जा सकता है।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 4,695-4,795 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,125-6,185 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,430 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,300-2,575 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,545-1,625 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,545-1,655 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,470 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,040 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 7,830 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 7,940 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,080 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,180 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,040-5,115 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,815-4,890 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 08, 2023 09:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

