नयी दिल्ली, एक अगस्त दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों और मूंगफली तेल तिलहन के दाम में सामान्य गिरावट देखने को मिली जबकि सोयाबीन डीगम तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ। सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकागो एक्सचेंज और मलेशिया एक्सचेंज में अधिक घट बढ़ नहीं है। कल रात शिकागो एक्सचेंज में गिरावट के बाद देर रात वापस सुधार होने से सोयाबीन डीगम तेल के दाम में सुधार हुआ।
देश के प्रमुख तेल संगठन, साल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने सरकार से चावल भूसी डीआयल्ड केक (डीओसी) के निर्यात पर रोक के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है ताकि इसके वैश्विक मांग का लाभ मिल सके। उसका कहना है कि इससे दूध की महंगाई पर बहुत मामूली असर आयेगा।
हालांकि सूत्रों ने कहा कि सरकार का चावल भूसी डीओसी के निर्यात पर रोक का फैसला एकदम ठीक है और इससे भी पहले सरकार को सूरजमुखी डीओसी के निर्यात पर भी रोक लगा देनी चाहिये थी।
दुधारू मवेशी के लिए सबसे बेहतर सूरजमुखी के खल को माना जाता है क्योंकि इसमें सबसे अधिक वसा (फैट) की मात्रा होती है जो दुधारू मवेशियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। सूरजमुखी के डीओसी का निर्यात होता है और खल से डीओसी निकालने के दौरान उसमें बचा खुचा तेल भी निचोड़ लिया जाता है। सूरजमुखी डीओसी का निर्यात रोकने से देश में सूरजमुखी खल की उपलब्धता में भी सुधार होगा।
सूत्रों ने कहा कि एसईए को इस बात की चिंता जरूर करनी चाहिये कि जिन देशों (ब्राजील, अर्जेन्टीना और मलेशिया) में खाद्यतेल का भंडार रखने की जगह नहीं है वे पूरे दाम पर हमें तेल बेच रहे हैं और खाद्यतेल के लिए लगभग 55-60 प्रतिशत निर्भर भारत में यही आयातित तेल लागत से कम दाम पर क्यों बेचा जा रहा है ?
उन्होंने कहा कि उन्हें सस्ते आयातित तेलों के बेछूट आयात के समय भी सरकार को आगाह करना चाहिये था कि यह देश के तेल तिलहन उत्पादन बढ़ाने की राह में रोड़ा साबित होगा।
सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में विशेषकर त्योहारों के दौरान सूरजमुखी तेल की मांग बढ़ेगी क्योंकि मूंगफली और बिनौला तेल की कमी है जो नवंबर बाद गुजरात, महाराष्ट्र में बिनौले और मूंगफली की अगली फसल आने तक रहेगी। सरकार को इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने होंगे।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,675-5,725 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,700-7,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,630 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,695-2,980 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,810 -1,890 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,810 -1,920 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,080-5,175 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,845-4,940 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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