टाटा संस की सालाना आम बैठक बृहस्पतिवार को पहली बार ऑनलाइन हुई। हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है और न ही कोई ब्योरा उपलब्ध कराया गया है। सूत्रों का कहना है कि बैठक में मिस्त्री परिवार की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने समूह की दो प्रमुख कंपनियों टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के प्रदर्शन में आई गिरावट और उनपर बढ़ते कर्ज का मुद्दा उठाया। मिस्त्री समूह की कंपनियां टाटा संस में सबसे बड़ी शेयरधारकों में से एक हैं।
मिस्त्री परिवार की टाटा संस में 18.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों ने बताया कि मिस्त्री परिवार की ओर से टाटा संस के हालिया निवेश फैसलों पर भी सवाल उठाए गए। उनका कहना था कि ये निवेश नुकसान का वित्तपोषण करने के लिए किए गए।
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हालांकि, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह अपने पूर्ववर्ती मिस्त्री की वजह से पैदा हुई ‘अव्यवस्था’ को ठीक करने में जुटे हैं।
एक अन्य सूत्र ने बताया कि चंद्रशेखरन ने कहा कि यह सारी ‘गड़बड़ी 2013-16 के दौरान हुई जब मिस्त्री समूह के चेयरमैन थे।
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उन्होंने यह भी कहा कि टाटा संस द्वारा परिचालन वाली कंपनियों में निवेश समूह की कंपनियों के पूंजी ढांचे को ठीक करने और उनकी देनदारियों में किसी चूक से बचने के लिए किया गया है।
इस एजीएम में टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा भी शामिल हुए। बैठक में मिस्त्री परिवार की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टाटा मोटर्स और टाटा स्टील के बढ़ते घाटे और कर्ज का मुद्दा उठाया।
इसके अलावा उन्होंने ऑडिटरों द्वारा टाटा स्टील यूरोप और एयर एशिया इंडिया के व्यवहार्य कंपनी बने रहने को लेकर उनकी क्षमता को लेकर की गई टिप्पणी पर भी चिंता जताई।
सूत्रों ने बताया कि चंद्रशेखरन ने कहा कि पिछले तीन साल के दौरान टाटा स्टील के पुनर्गठन के लिए काफी प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की पुनरोद्धार योजना प्रभावित हुई है।
एयरलाइन कंपनी के नुकसान पर चंद्रशेखर ने कहा कि इसमें निवेश की प्रतिबद्धता पहले ही जताई जा चुकी थी और टाटा संस अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एयरलाइन कारोबार को लाभ में आने में अधिक समय लगता है।
मिस्त्री परिवार के प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि क्या एयर एशिया इंडिया और विस्तार में निवेश से पहले टाटा संस के बोर्ड ने सही तरीके से विश्लेषण किया था। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि इस समय एयर एशिया इंडिया की देनदारियां उसकी मौजूदा संपत्तियों से 1,200 करोड़ रुपये अधिक हो चुकी हैं। कंपनी का नेटवर्थ पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
सूत्रों ने कहा कि उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि टाटा इसमें संयुक्त उद्यम भागीदारों की हिस्सेदारी खरीदती है तो क्या यह विमानन कंपनी की सिर्फ देनदारियां खरीदना नहीं होगा।
हालांकि, मिस्त्री परिवार के प्रतिनिधियों ने टाटा कम्युनिकेशंस के अच्छे प्रदर्शन और टाटा पावर की कर्ज को कम करने की रणनीति की प्रशंसा भी की। इसके अलावा उन्होंने टाटा समूह द्वारा कोविड-19 से लड़ाई के प्रयासों को भी सराहा।
टाटा संस के निदेशक मंडल ने मिस्त्री को 24 अक्टूबर, 2016 को चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबी कानूनी लड़ाई छिड़ी।
इस साल जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद पर बहाल करने के आदेश पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि न्यायाधिकरण के फैसले में ‘खामी’ है।
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