देश की खबरें | ग्रामीण विकास मंत्रालय मनरेगा कार्यों की निगरानी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल पर दे रहा जोर

नयी दिल्ली, 20 अगस्त ग्रामीण इलाकों, विशेषकर कृषि क्षेत्र में मानव रहित हवाई यानों के इस्तेमाल पर केंद्र के जोर देने के अनुरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा के तहत कार्यों की निगरानी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर एक नयी नीति तैयार की है।

ड्रोन का इस्तेमाल कार्यों की निगरानी, पूर्ण कार्य के निरीक्षण और प्रभाव मूल्यांकन के लिए किया जाएगा। इसका इस्तेमाल शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक जिले में नियुक्त लोकपाल द्वारा भी किया जा सकता है।

ड्रोन का इस्तेमाल करने पर व्यय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के प्रशासनिक आकस्मिक घटक के तहत किया जा सकता है, जो राज्य को आवंटित निधि का लगभग 10 प्रतिशत है। इसके लिए कोई अतिरिक्त आवंटन नहीं किया गया है और राज्यों को ड्रोन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने में विशेषज्ञता वाली एजेंसियों को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।

मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) वाले परिपत्र में कहा गया है, ‘‘ड्रोन के इस्तेमाल का लाभ उठाने के लिए मनरेगा के तहत कार्यों और संपदा की गुणवत्ता की निगरानी और निरीक्षण के लिए इस तकनीक का उपयोग करने का प्रस्ताव किया गया है।’’

काम शुरू होने से पहले, निष्पादन के दौरान और काम पूरा होने के बाद तस्वीरें खींचकर कार्यों की निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। योजना के तहत किए गए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल और कृषि संबंधी कार्यों के प्रभाव मूल्यांकन के संबंध में समय-समय के डेटा के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

परिपत्र में कहा गया है कि किए गए कार्य या निर्माण के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करके विशेष निरीक्षण भी किया जाएगा। इससे प्रत्येक जिले में नियुक्त लोकपालों को शिकायतें प्राप्त करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने कहा कि लोकपाल कार्यों के सत्यापन के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह सुविधा लोकपाल को एक निश्चित तरीके से फैसला करने में मदद करेगी। इसलिए, राज्य सरकार को शिकायतों के समय पर निवारण के लिए लोकपाल को ड्रोन सुविधा प्रदान करनी चाहिए।’’

इसमें कहा गया है कि ड्रोन का इस्तेमाल करके कार्यों की निगरानी की मात्रा राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तय की जा सकती है।

मंत्रालय ने एसओपी में निर्देश दिया है कि इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन में उच्च गुणवत्ता वाला कैमरा होना चाहिए। उपयोगकर्ताओं को तस्वीरों में छाया को कम करने के लिए सूर्य की बेहतर रोशनी की स्थिति में ड्रोन के माध्यम से निगरानी करने के लिए भी कहा गया है। आंशिक रूप से बादल वाले दिनों और तेज हवाओं से बचने का भी सुझाव दिया गया है। ड्रोन को कम से कम 30 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम होना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि ड्रोन के माध्यम से लिए गए सभी वीडियो और तस्वीरों को ऑनलाइन प्रणाली ‘नरेगा सॉफ्ट’ के साथ साझा किया जाना चाहिए। तुलनात्मक अध्ययन के लिए डेटा का संग्रह किया जाना चाहिए। डेटा का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्र की व्यवस्थित और वैज्ञानिक योजना और निगरानी के लिए किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन के संचालन और मरम्मत के लिए ऋण और प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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