देश की खबरें | भोपाल गैस त्रासदी के दौरान जन्मे पुरुषों में अक्षमता, कैंसर होने का अधिक खतरा: अध्ययन

नयी दिल्ली, सात मई भारत की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में शामिल 1984 भोपाल गैस त्रासदी के दौरान और उसके बाद जन्मे पुरुषों में अक्षम होने या कैंसर से पीड़ित होने का अपेक्षाकृत अधिक खतरा होने की आशंका है। एक अध्ययन में यह पाया गया है।

‘बीएमजे ओपन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि औद्योगिक दुर्घटनाओं के लोगों के जीवन पर हादसे के कई वर्ष बाद भी दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

अमेरिका स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो’ में एसोसिएट टीचिंग प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक गॉर्डन मैक्कार्ड ने कहा, ‘‘हमारे शोधपत्र में इस बात के सबूत मिलते हैं कि भारत में सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में शामिल दिसंबर 1984 में हुई भोपाल गैस आपदा के कारण उन पुरुषों को जीवन में बाद में अक्षमताएं विकसित होने और कैंसर से पीड़ित होने का अधिक खतरा हो सकता है, जो उस समय गर्भ में थे।’’

मैक्कार्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘शोध के परिणाम यह बताते हैं कि भोपाल गैस त्रासदी ने पहले के अनुमान के मुकाबले अधिक व्यापक इलाके में उल्लेखनीय रूप से लोगों को प्रभावित किया है।’’

भोपाल में एक कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था और जहरीली गैस सात किलोमीटर के दायरे में फैल गई थी, जिससे भोपाल शहर में पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे और क्षेत्र में 20,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

यूसी सैन डिएगो में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एवं शोध के लेखक प्रशांत भारद्वाज ने कहा, ‘‘जीवित बचे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर इस त्रासदी के कारण गंभीर दीर्घकालिक प्रभाव पड़े जिनमें श्वसन, तंत्रिका तंत्र, नेत्र और अंतःस्रावी संबंधी समस्याएं शामिल हैं।’’

इस गैस के रिसाव के कारण भूजल भी दूषित हो गया और इसने महिलाओं की प्रजनन क्षमता समेत अन्य अंगों को भी प्रभावित किया। इसका अर्थ यह है कि जो पीढ़ियां इस जहरीली गैस के सीधे संपर्क में नहीं आईं, उनके स्वास्थ्य पर भी इसके कारण प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

अध्ययन में पहले के अध्ययनों का जिक्र किया गया है और बताया गया है कि गैस रिसाव त्रासदी के बाद गर्भपात की दर में चार गुना वृद्धि हुई और मृत शिशुओं के जन्म और नवजात शिशुओं की मौत की दर में भी बढ़ोतरी हुई।

यह पहला शोध है, जिसमें इस प्रकार के हादसे के कई पीढ़ियों पर पड़ने वाले असर का इतना व्यापक अध्ययन किया गया है। इसमें भोपाल गैस त्रासदी के बाद जीवित बचीं महिलाओं के बच्चों पर दुर्घटना का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की बात की गई है।

शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर-विशेष रूप से वयस्कों में कैंसर की दर और शारीरिक अक्षमता का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण जैसे स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

उन्होंने 2015-16 में मध्य प्रदेश में रहने वाले 15 से 49 वर्ष की आयु के 47,817 लोगों के अलावा 1960 और 1990 के बीच पैदा हुए 13,369 पुरुषों संबंधी सामाजिक आर्थिक आंकड़ों का इस्तेमाल करके स्वास्थ्य प्रभावों की समीक्षा की। इन आंकड़ों में वे 1,260 लोग भी शामिल किए गए, जिन्हें भोपाल के 250 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली महिलाओं ने 1981 और 1985 के बीच जन्म दिया था।

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