मेरठ (उप्र), 26 मई मेरठ में शुक्रवार को नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर हरिकांत अहलूवालिया और 90 पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम’ को लेकर हंगामा हो गया।
सूत्रों के अनुसार चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में हंगामा उस समय हुआ जब कार्यक्रम का शुभारंभ करने के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाया गया, जिसमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के पार्षदों ने ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने कार्यक्रम के बीच में ही मारपीट शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वहां तैनात पुलिस ने हस्तक्षेप किया और किसी तरह एआईएमआईएम और भाजपा सदस्यों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
हंगामे के बीच मेरठ के मंडलायुक्त ने महापौर को शपथ दिलाई। उसके बाद महापौर अहलूवालिया ने 15-15 पार्षदों के समूह में शपथ दिलाई। इस दौरान ‘वंदे मातरम’ और भारत माता की जय के नारे गूंजते रहे।
उधर, मेडिकल थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) योगेंद्र सिंह ने कहा कि एआईएमआईएम नेता इस संबंध में तहरीर दे रहे हैं और शिकायत मिलने के बाद ही वह इस मामले में कुछ बता सकेंगे।
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए एआईएमआईएम के पार्षदों ने ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर भाजपा पार्षदों पर मारपीट करने का आरोप लगाया।
घटना पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने ‘पीटीआई-’ से बातचीत में कहा कि इन लोगों को 'वंदे मातरम' से आपत्ति क्यों है। वाजपेयी ने कहा, "जब वे भारत के संविधान की शपथ लेते हैं तो भारत के संविधान में उल्लिखित 'वंदे मातरम' गाने पर यह आपत्ति क्यों। इसे गाने की कोई बाध्यता नहीं है लेकिन कम से कम खड़े होकर शांत हो जाएं।"
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